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Breaking News: इजरायल ने 12 ब्रिटिश नागरिकों की एंट्री पर लगाई रोक, यरूशलम में वाणिज्य दूतावास किया बंद, ब्रिटेन के प्रतिबंधों से बढ़ा तनाव
🕒 4 hours ago

इजरायल और ब्रिटेन के बीच राजनयिक तनाव चरम पर पहुंच गया है जब इजरायल ने सोमवार को 12 ब्रिटिश नागरिकों के देश में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया और यरूशलम स्थित ब्रिटिश वाणिज्य दूतावास को बंद करने का आदेश जारी कर दिया। यह कदम ब्रिटेन द्वारा अवैध इजरायली बस्तियों से जुड़े सामानों के आयात पर प्रतिबंध लगाने के फैसले के जवाब में उठाया गया है। इजरायल के विदेश मंत्री इजरायल काट्ज ने इस कार्रवाई को ब्रिटेन के "एकतरफा और भेदभावपूर्ण" कदम का सीधा जवाब बताया है, जिससे दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में गंभीर दरार पैदा हो गई है। ब्रिटेन की सरकार ने पिछले सप्ताह घोषणा की थी कि वह कब्जे वाले वेस्ट बैंक में इजरायली बस्तियों से आने वाले उत्पादों पर व्यापार प्रतिबंध लगाएगा, जिसे अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अवैध माना जाता है। ब्रिटिश विदेश मंत्री डेविड लैमी ने कहा था कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन सुनिश्चित करने और दो-राष्ट्र समाधान की संभावनाओं को बनाए रखने के लिए जरूरी है। हालांकि, इजरायल ने इस फैसले को "यहूदी विरोधी" और "इजरायल को बदनाम करने वाला" करार देते हुए कड़ी निंदा की थी। इजरायल का तर्क है कि ये बस्तियां यहूदी लोगों की ऐतिहासिक मातृभूमि का हिस्सा हैं और ब्रिटेन का यह कदम शांति प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाता है। प्रतिबंधित किए गए 12 ब्रिटिश नागरिकों में कथित तौर पर वे कार्यकर्ता और अधिकारी शामिल हैं जो बस्ती विरोधी गतिविधियों में शामिल रहे हैं या इजरायल की नीतियों के आलोचक रहे हैं। इसके अलावा, यरूशलम में ब्रिटिश वाणिज्य दूतावास को बंद करने का फैसला एक अभूतपूर्व राजनयिक कदम है, क्योंकि यह दूतावास फिलिस्तीनी मामलों और यरूशलम में ब्रिटिश हितों का प्रतिनिधित्व करता था। इजरायल के इस कदम से ब्रिटेन में खासी नाराजगी है और ब्रिटिश सरकार ने इसे "अनुचित और गैर-आनुपातिक" बताते हुए इजरायल से फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। इस तनाव का असर दोनों देशों के बीच रक्षा, खुफिया और व्यापारिक सहयोग पर पड़ने की आशंका है। ब्रिटेन इजरायल का एक प्रमुख सहयोगी रहा है, लेकिन गाजा युद्ध के बाद से अंतरराष्ट्रीय दबाव में ब्रिटेन की नीति में बदलाव देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह गतिरोध जल्द खत्म नहीं हुआ तो इसका खामियाजा क्षेत्रीय स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को भुगतना पड़ सकता है। फिलहाल दोनों पक्ष अपने रुख पर अड़े हुए हैं, जिससे तनाव और बढ़ने के आसार हैं। निष्कर्ष के तौर पर, इजरायल और ब्रिटेन के बीच उपजा यह विवाद अंतरराष्ट्रीय संबंधों में मानवाधिकारों, अंतरराष्ट्रीय कानून और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच के जटिल संतुलन को उजागर करता है। जहां ब्रिटेन अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन पर जोर दे रहा है, वहीं इजरायल इसे अपनी संप्रभुता और सुरक्षा के लिए खतरा मान रहा है। आने वाले दिनों में राजनयिक बातचीत के जरिए इस संकट को सुलझाने के प्रयास तेज होंगे, लेकिन फिलहाल दोनों देशों के रिश्ते बेहद नाजुक मोड़ पर खड़े हैं।

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✍️ By Pradeep Yadav | 08 Sep 2026