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Breaking News: ईरान ने अमेरिकी नौसेना के जहाजों पर किया दूसरा हमला, चीन-रूस की मदद की आशंका से बढ़ा तनाव
🕒 5 hours ago

खाड़ी क्षेत्र में तनाव उस समय चरम पर पहुंच गया जब सोमवार को ईरान ने अमेरिकी नौसेना के जहाजों पर दूसरा बड़ा हमला बोला। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने होरमुज जलडमरूमध्य में एक आधुनिक मानवरहित अमेरिकी पनडुब्बी को जब्त करने का दावा किया है। इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है, विशेष रूप से तब जब आशंका जताई जा रही है कि ईरान को चीन और रूस जैसे शक्तिशाली देशों से सैन्य और तकनीकी सहायता मिल रही है। ईरान के सरकारी मीडिया और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के बयानों के अनुसार, जब्त की गई पनडुब्बी अत्याधुनिक तकनीक से लैस थी और यह खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी गतिविधियों की निगरानी कर रही थी। ईरान ने इसे अपनी जलसीमा का उल्लंघन करार देते हुए कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है। वहीं, अमेरिकी रक्षा विभाग के अधिकारियों ने एक बयान में माना है कि मध्य पूर्व में उनका एक अंडरवाटर ड्रोन तकनीकी खराबी का शिकार हुआ था, हालांकि उन्होंने इसे ईरान द्वारा जब्त किए जाने की पुष्टि नहीं की है। तेहरान ने वाशिंगटन के खिलाफ अपने रुख को और सख्त करते हुए 'आर्थिक युद्ध', मिसाइल हमलों और खाड़ी क्षेत्र को बहिष्करण क्षेत्र घोषित करने की धमकी दी है। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि अमेरिका की क्षेत्र में मौजूदगी अस्थिरता का मुख्य कारण है। भारत टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार को ही ईरान ने अमेरिकी नौसैनिक बेड़े पर हमले की दूसरी लहर शुरू की, जिससे क्षेत्र में पूर्ण सैन्य टकराव का खतरा मंडराने लगा है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन और रूस का परोक्ष समर्थन ईरान के हौसले बुलंद कर रहा है। दोनों देश खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी प्रभाव को कम करने के लिए ईरान को रणनीतिक साझेदार मानते हैं। इस घटनाक्रम का असर वैश्विक तेल आपूर्ति पर भी पड़ सकता है, क्योंकि होरमुज जलडमरूमध्य से दुनिया का एक बड़ा हिस्सा कच्चे तेल का परिवहन होता है। भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए यह स्थिति गंभीर आर्थिक चुनौती खड़ी कर सकती है। फिलहाल, अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक प्रयास जारी हैं ताकि स्थिति को और बिगड़ने से रोका जा सके। संयुक्त राष्ट्र और प्रमुख वैश्विक शक्तियों ने संयम बरतने की अपील की है। लेकिन जिस तरह के बयान दोनों तरफ से आ रहे हैं, उससे निकट भविष्य में तनाव कम होने के आसार कम ही नजर आते हैं। दुनिया की नजर अब इस बात पर टिकी है कि अमेरिका इस उकसावे पर कैसी प्रतिक्रिया देता है और क्या कूटनीति के रास्ते इस संकट का हल निकल पाता है।

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✍️ By Pradeep Yadav | 08 Sep 2026