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Breaking News: सत्य निकेतन पीजी भवन हादसा: मालिक और पत्नी न्यायिक हिरासत में, पुत्र दो दिन के रिमांड पर
🕒 11 hours ago

दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक पेइंग गेस्ट (पीजी) भवन के ढहने से हुए दर्दनाक हादसे ने राजधानी को झकझोर कर रख दिया है। इस दुर्घटना में अब तक छह से सात लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई अन्य घायल अवस्था में अस्पताल में भर्ती हैं। घटना के तुरंत बाद हरकत में आई दिल्ली पुलिस ने भवन मालिक, उसकी पत्नी और पुत्र को हिरासत में लेकर कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। अदालत ने मालिक और उसकी पत्नी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है, वहीं पुत्र को दो दिन की पुलिस रिमांड पर सौंपा गया है ताकि हादसे के कारणों और लापरवाही की गहन जांच की जा सके। प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय निवासियों के अनुसार, हादसे से कुछ घंटे पहले ही इमारत की दीवारों में दरारें दिखाई देने लगी थीं और पड़ोस के मकानों में कंपन महसूस किया गया था। लोगों ने खतरा भांपकर शोर मचाया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। देखते ही देखते चार मंजिला इमारत ताश के पत्तों की तरह भरभराकर गिर पड़ी। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), दिल्ली दमकल सेवा और स्थानीय पुलिस की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और मलबे में दबे लोगों को निकालने के लिए युद्धस्तर पर बचाव अभियान चलाया। बचावकर्मियों ने कटर और भारी मशीनरी की मदद से कंक्रीट के ढेर को हटाकर जीवित बचे लोगों और शवों को बाहर निकाला। दिल्ली की एक अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस ने दलील दी कि भवन मालिक ने निर्माण मानदंडों का घोर उल्लंघन किया था और बिना अनुमति के अतिरिक्त मंजिलों का निर्माण कराया था। साथ ही, पीजी के रूप में संचालन के लिए जरूरी अग्निशमन और सुरक्षा मानकों की भी अनदेखी की गई। अदालत ने पुलिस की दलीलों से सहमत होकर मालिक दंपति को न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया, जबकि पुत्र से पूछताछ के लिए दो दिन का रिमांड मंजूर किया। पुलिस अब भवन के नक्शे, निर्माण में प्रयुक्त सामग्री की गुणवत्ता और नगर निगम से मिली अनुमतियों की बारीकी से जांच कर रही है। इस हादसे ने एक बार फिर दिल्ली में अवैध निर्माण और असुरक्षित भवनों में चल रहे पीजी आवासों की पोल खोल दी है। नगर निगम और दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) पर सवाल उठ रहे हैं कि खतरनाक स्थिति वाले भवनों की समय पर पहचान और कार्रवाई क्यों नहीं की गई। मुख्यमंत्री ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने और घायलों का निशुल्क इलाज कराने की घोषणा की है। साथ ही, उन्होंने सभी जोनल अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में असुरक्षित भवनों का सर्वेक्षण कर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। सत्य निकेतन का यह हादसा महज एक दुर्घटना नहीं, बल्कि व्यवस्था की लापरवाही और लालच का नतीजा है। बेगुनाह छात्रों और कामकाजी युवाओं की जान जाने के बाद अब यह जरूरी हो गया है कि प्रशासन केवल जांच और मुआवजे तक सीमित न रहे, बल्कि भवन निर्माण नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करे। अवैध निर्माणकर्ताओं के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ नागरिकों को भी जागरूक होना होगा कि वे सुरक्षा मानकों को नजरअंदाज कर सस्ते आवास के चक्कर में अपनी जान जोखिम में न डालें। इस त्रासदी से सबक लेकर ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सकती है।

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✍️ By Pradeep Yadav | 08 Sep 2026