मुंबई के एक प्रतिष्ठित मॉल में हथियार लेकर घुसने के आरोप में पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक शख्स खुद को प्रधानमंत्री कार्यालय का अधिकारी बता रहा था और दूसरा उसका कथित हथियारबंद बॉडीगार्ड था। यह घटना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुंबई दौरे से ठीक पहले घटी, जिससे सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया। हालांकि, पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इस घटना का प्रधानमंत्री के कार्यक्रम से कोई लेना-देना नहीं है और यह एक अलग आपराधिक मामला प्रतीत होता है। गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान रोहन पारेख, उसके साथी और एक अन्य व्यक्ति के रूप में हुई है। रोहन पारेख ने खुद को पीएमओ का वरिष्ठ अधिकारी बताते हुए फर्जी पहचान पत्र और नियुक्ति पत्र दिखाए थे। उसका साथी हथियार के साथ उसके बॉडीगार्ड की भूमिका निभा रहा था। मॉल की सुरक्षा टीम को शक होने पर उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचित किया, जिसके बाद त्वरित कार्रवाई करते हुए तीनों को हिरासत में ले लिया गया। तलाशी के दौरान उनके पास से एक अवैध हथियार और फर्जी दस्तावेज बरामद हुए। पुलिस आयुक्त ने मीडिया को बताया कि प्रारंभिक जांच में पता चला है कि आरोपी किसी आतंकी साजिश का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि यह धोखाधड़ी और अवैध हथियार रखने का मामला है। उन्होंने कहा, "हमने प्रधानमंत्री के कार्यक्रम से किसी भी तरह के संबंध को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। आरोपी मॉल में किसी अन्य मकसद से आए थे और उनका प्रधानमंत्री के दौरे से कोई संबंध नहीं है।" सुरक्षा एजेंसियां अब आरोपियों के पृष्ठभूमि और उनके पास फर्जी दस्तावेज कहां से आए, इसकी गहन जांच कर रही हैं। अदालत में सुनवाई के दौरान रोहन पारेख के वकील ने दावा किया कि उनके मुवक्किल को एक फर्जी एजेंसी द्वारा पीएमओ में नौकरी का प्रस्ताव पत्र और पहचान पत्र दिया गया था, जिससे वह भ्रम में पड़ गए। वकील ने कहा कि पारेख निर्दोष हैं और उन्हें फंसाया गया है। हालांकि, अभियोजन पक्ष ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि आरोपी अच्छी तरह जानते थे कि वे क्या कर रहे हैं और उनके पास से बरामद हथियार उनकी मंशा पर सवाल खड़े करता है। अदालत ने आरोपियों को पुलिस हिरासत में भेज दिया है। इस घटना ने वीआईपी सुरक्षा और सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा जांच की पोल खोल दी है। प्रधानमंत्री के दौरे से पहले ऐसी चूक गंभीर सवाल खड़े करती है, भले ही पुलिस का कहना है कि इसका कार्यक्रम से कोई संबंध नहीं। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि फर्जी पहचान पत्र और हथियार लेकर मॉल में घुसना सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी खामी दर्शाता है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या इस गिरोह के तार किसी बड़े नेटवर्क से जुड़े हैं और उन्होंने पहले भी ऐसी वारदातों को अंजाम दिया है या नहीं।