दिल्ली की एक अदालत ने जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारी के साथ मारपीट के मामले में कथित हिंदुत्व प्रभावशाली व्यक्ति स्वतंत्र भारद्वाज को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। यह फैसला तब आया जब दिल्ली पुलिस ने भारद्वाज को बुलंदशहर से गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया। मामला नागरिक न्याय और शांति (सीजेपी) के एक प्रदर्शनकारी पर हमले से जुड़ा है, जिसने राजधानी में सामाजिक-राजनीतिक हलकों में काफी ध्यान आकर्षित किया है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को न्यायिक हिरासत में रखने का आदेश दिया ताकि जांच बिना किसी बाधा के आगे बढ़ सके। इससे पहले दिल्ली उच्च न्यायालय ने भारद्वाज की गिरफ्तारी के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया था। भारद्वाज ने अपनी याचिका में दावा किया था कि दिल्ली पुलिस ने बुलंदशहर जाकर उन्हें गिरफ्तार करने का दुस्साहस किया, जो उनके अनुसार क्षेत्राधिकार से बाहर की कार्रवाई थी। हालांकि उच्च न्यायालय ने उनके तर्कों को स्वीकार नहीं किया और गिरफ्तारी को वैध ठहराते हुए हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि पुलिस को अपराध की जांच और आरोपी को गिरफ्तार करने का पूरा अधिकार है, भले ही गिरफ्तारी किसी अन्य राज्य में क्यों न की गई हो। मामले के अनुसार, जंतर मंतर पर आयोजित एक विरोध प्रदर्शन के दौरान भारद्वाज और उनके सहयोगियों ने कथित तौर पर एक प्रदर्शनकारी के साथ मारपीट की थी। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद दिल्ली पुलिस ने स्वत: संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया था। पुलिस का कहना है कि भारद्वाज के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है, जिनमें जानबूझकर चोट पहुंचाना, आपराधिक धमकी और सार्वजनिक शांति भंग करना शामिल है। जांच में यह भी सामने आया है कि भारद्वाज सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय हैं और उनके बड़ी संख्या में अनुयायी हैं। भारद्वाज की गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सोशल मीडिया प्रभावशाली व्यक्तियों की जिम्मेदारी और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों पर बहस छेड़ दी है। कुछ वर्गों का मानना है कि यह कार्रवाई असहमति की आवाज को दबाने का प्रयास है, जबकि अन्य इसे कानून के शासन की जीत बता रहे हैं। दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि गिरफ्तारी पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है और किसी भी व्यक्ति को कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो। इस मामले की अगली सुनवाई अब 14 दिनों की न्यायिक हिरासत अवधि समाप्त होने के बाद होगी। तब तक भारद्वाज तिहाड़ जेल में रहेंगे। पुलिस का कहना है कि वह मामले में अन्य आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए भी प्रयास कर रही है। साथ ही घटना के वीडियो फुटेज और गवाहों के बयानों को सबूत के तौर पर जुटाया जा रहा है। यह मामला एक बार फिर सार्वजनिक स्थानों पर हिंसा और सोशल मीडिया प्रभावशाली व्यक्तियों की भूमिका को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है, जिनका जवाब अदालती कार्यवाही के दौरान सामने आएगा।