दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को हिंदुत्व कार्यकर्ता और सोशल मीडिया प्रभावक स्वतंत्र भारद्वाज की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने अपनी गिरफ्तारी को चुनौती दी थी। यह मामला जंतर मंतर पर नागरिक न्याय और शांति (सीजेपी) के प्रदर्शनकारियों पर कथित हमले से जुड़ा है। न्यायमूर्ति की पीठ ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि गिरफ्तारी कानूनी प्रक्रिया के तहत हुई है और इसमें हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं है। अदालत ने इस मामले में अगली सुनवाई के लिए 7 सितंबर की तारीख तय की है। स्वतंत्र भारद्वाज ने अदालत में दलील दी थी कि दिल्ली पुलिस ने बुलंदशहर जाकर उन्हें गिरफ्तार किया जो उनके अधिकारों का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने बिना किसी पूर्व सूचना के उनके घर पर छापा मारा और उन्हें जबरन दिल्ली ले आई। हालांकि, दिल्ली पुलिस की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि गिरफ्तारी पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया के अनुसार हुई है और उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच के दौरान भारद्वाज की भूमिका स्पष्ट रूप से सामने आई है। इससे पहले निचली अदालत ने भारद्वाज को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। मामला इसी साल जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान सीजेपी कार्यकर्ताओं पर हुए कथित हमले से संबंधित है। आरोप है कि भारद्वाज के नेतृत्व में कुछ लोगों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं पर हमला किया था, जिसमें कई लोग घायल हुए थे। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद दिल्ली पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। भारद्वाज के वकील ने अदालत से जमानत देने की मांग करते हुए कहा कि उनके मुवक्किल निर्दोष हैं और उन्हें राजनीतिक कारणों से फंसाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि घटना के समय भारद्वाज मौके पर मौजूद नहीं थे। हालांकि, अभियोजन पक्ष ने सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के बयानों का हवाला देते हुए कहा कि भारद्वाज न केवल मौके पर मौजूद थे बल्कि उन्होंने भीड़ को उकसाने का काम भी किया था। इस फैसले के बाद सामाजिक संगठनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने राहत की सांस ली है। सीजेपी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि यह फैसला कानून के शासन की जीत है और इससे स्पष्ट संदेश जाता है कि किसी भी व्यक्ति को कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है। वहीं, भारद्वाज के समर्थकों ने इस फैसले को राजनीति से प्रेरित बताते हुए ऊपरी अदालत में अपील करने की बात कही है। मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर को होगी, जिसमें आरोप तय किए जाने पर बहस होगी।