दिल्ली की एक अदालत ने जंतर मंतर पर हुए मारपीट मामले में कथित तौर पर संलिप्त स्वतंत्र भारद्वाज को एक दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। यह मामला उस घटना से जुड़ा है जब भारद्वाज पर प्रदर्शनकारियों के साथ कथित तौर पर मारपीट करने का आरोप लगा था। पुलिस ने अदालत के समक्ष वायरल वीडियो फुटेज प्रस्तुत किए जिनमें भारद्वाज को घटनास्थल पर मौजूद दिखाया गया है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस की कई टीमों ने भारद्वाज से गहन पूछताछ की है। अदालत ने फिलहाल एक दिन की न्यायिक हिरासत मंजूर की है जिसके बाद आगे की कार्रवाई पर फैसला होगा। मामले की जांच कर रही दिल्ली पुलिस ने भारद्वाज को कई वायरल वीडियो दिखाकर उनसे पूछताछ की। सूत्रों के अनुसार पुलिस की कई टीमों ने अलग-अलग कोणों से भारद्वाज से सवाल-जवाब किए। इस दौरान भारद्वाज के वकील ने सुनवाई की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे असामान्य बताया। वकील का कहना है कि रिमांड सुनवाई के दौरान कई प्रक्रियागत खामियां रहीं। पुलिस का दावा है कि उनके पास भारद्वाज की संलिप्तता साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं जिनमें वीडियो फुटेज और चश्मदीद गवाहों के बयान शामिल हैं। इस बीच दिल्ली उच्च न्यायालय आज भारद्वाज की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करेगा। यह याचिका भारद्वाज की गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए दायर की गई है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि गिरफ्तारी प्रक्रिया में कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन किया गया है। उच्च न्यायालय का फैसला इस मामले की आगे की दिशा तय करेगा। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह सुनवाई महत्वपूर्ण होगी क्योंकि इसमें गिरफ्तारी की वैधता और प्रक्रियात्मक पहलुओं की जांच होगी। एक संबंधित घटनाक्रम में सीजेपी (सिटीजंस फॉर जस्टिस एंड पीस) के एक कार्यकर्ता ने आरोप लगाया है कि भारद्वाज की गिरफ्तारी के कुछ घंटों बाद उनके घर पर पथराव किया गया। कार्यकर्ता का दावा है कि यह घटना भारद्वाज की गिरफ्तारी से जुड़ी हो सकती है। पुलिस ने इस आरोप की जांच शुरू कर दी है और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। इस घटना ने मामले को और जटिल बना दिया है। इस पूरे प्रकरण ने सोशल मीडिया और कानूनी हलकों में व्यापक चर्चा छेड़ दी है। एक तरफ जहां पुलिस अपनी कार्रवाई को न्यायसंगत बता रही है वहीं भारद्वाज के समर्थक इसे राजनीति से प्रेरित बता रहे हैं। आने वाले दिनों में अदालती फैसले और जांच के नतीजे इस मामले की असल तस्वीर साफ करेंगे। फिलहाल सभी पक्ष अदालत की अगली कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।