राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक बहुमंजिला इमारत के अचानक ढह जाने से भयावह हादसा सामने आया है। इस दुर्घटना में अब तक छह लोगों की मौत हो चुकी है जबकि ग्यारह लोगों को मलबे से जीवित निकालने में सफलता मिली है। बचाव दल लगातार मलबे में दबे लोगों की तलाश में जुटे हुए हैं और राहत कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है। स्थानीय प्रशासन के साथ एनडीआरएफ, दमकल विभाग और पुलिस की टीमें मौके पर मौजूद हैं। हादसा उस समय हुआ जब इमारत में मरम्मत का कार्य चल रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार अचानक तेज आवाज के साथ पूरी इमारत भरभरा कर गिर गई। सीसीटीवी फुटेज में इमारत के ढहने का भयानक मंजर कैद हुआ है जिसमें देखा जा सकता है कि चंद सेकंड में पूरी संरचना जमींदोज हो गई। मलबे में दबे लोगों की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग सबसे पहले मदद के लिए पहुंचे। बचाव अभियान में लगी टीमों ने कटर, ड्रिल और भारी मशीनरी का इस्तेमाल करके मलबा हटाया। अंधेरा होने के बावजूद रोशनी की व्यवस्था करके रातभर तलाशी अभियान चलाया गया। घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है जहां उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। इस घटना ने एक बार फिर दिल्ली में अवैध निर्माण और भवन सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पुरानी इमारतों में बिना तकनीकी जांच के मरम्मत कार्य करना जानलेवा साबित हो सकता है। नगर निगम के अधिकारियों की लापरवाही और भ्रष्टाचार के कारण ऐसी घटनाएं बार-बार सामने आ रही हैं। कहा जा रहा है कि इस इमारत को पहले ही असुरक्षित घोषित किया जा चुका था। मुख्यमंत्री ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने और घायलों के मुफ्त इलाज की घोषणा की है। साथ ही मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए गए हैं। दोषी अधिकारियों और बिल्डर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठ रही है। इस त्रासदी से सबक लेते हुए प्रशासन को भवन सुरक्षा ऑडिट अनिवार्य करना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी हृदयविदारक घटनाओं को रोका जा सके।