अमेरिका के विशेष दूत जेरेड कुशनर और स्टीव विटकोफ मास्को में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात के बाद मंगलवार को कीव पहुंचे। यह दौरा रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए अमेरिका के नए कूटनीतिक प्रयासों का हिस्सा है। दोनों दूतों ने कीव में यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ गहन वार्ता की। इस यात्रा को युद्धग्रस्त क्षेत्र में शांति की संभावनाएं तलाशने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, हालांकि दोनों पक्षों के बीच गहरे मतभेद अब भी बने हुए हैं। क्रेमलिन ने पुतिन और अमेरिकी दूतों की बैठक को उपयोगी बताया, लेकिन साथ ही कहा कि किसी बड़ी सफलता के संकेत नहीं मिले हैं। रूसी प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव के अनुसार, बातचीत रचनात्मक रही परंतु मूलभूत मुद्दों पर सहमति नहीं बनी। वहीं, ब्रिटिश अखबार गार्जियन ने इसे कुशनर और विटकोफ की पहली कीव यात्रा बताया जो पुतिन से सीधी वार्ता के बाद हुई है। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक ये वार्ताएं प्रतीकात्मक रूप से समृद्ध हैं, मगर रूस और यूक्रेन के बीच क्षेत्रीय अखंडता, सुरक्षा गारंटी और युद्धविराम की शर्तों जैसे जटिल विषयों पर गतिरोध कायम है। कीव में बैठक के बाद राष्ट्रपति जेलेंस्की ने मीडिया से कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध इस सर्दी तक भी खिंच सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यूक्रेन अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से कोई समझौता नहीं करेगा। जेलेंस्की ने अमेरिका से और मजबूत सुरक्षा गारंटी और हथियारों की आपूर्ति की मांग दोहराई। एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, जेलेंस्की ने चेतावनी दी कि यदि रूस वार्ता की आड़ में सैन्य तैयारी जारी रखता है तो संघर्ष लंबा खिंचने के आसार हैं। अमेरिकी दूतों का यह दौरा तब हो रहा है जब युद्ध अपने तीसरे वर्ष में प्रवेश कर चुका है और दोनों पक्ष थकान महसूस कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह कूटनीतिक पहल किसी ठोस युद्धविराम समझौते तक पहुंच पाएगी। विश्लेषकों का मानना है कि पुतिन और जेलेंस्की दोनों अपनी-अपनी लाल रेखाओं पर अड़े हुए हैं, जिससे निकट भविष्य में व्यापक शांति समझौता मुश्किल लगता है। निष्कर्ष के तौर पर, अमेरिकी दूतों की मास्को-कीव यात्रा ने बातचीत के दरवाजे खुले रखे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत और दोनों पक्षों की दृढ़ मांगें किसी त्वरित समाधान की उम्मीद कम करती हैं। आने वाले सप्ताहों में आगे की वार्ताओं और युद्धक्षेत्र की स्थिति पर बहुत कुछ निर्भर करेगा।