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Breaking News: कांग्रेस का बड़ा संगठनात्मक फेरबदल: सचिन पायलट को पंजाब की कमान, भूपेश बघेल असम भेजे गए
🕒 2 days ago

कांग्रेस पार्टी ने 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले एक अहम संगठनात्मक फेरबदल करते हुए अपने युवा नेता सचिन पायलट को पंजाब का प्रभारी नियुक्त किया है, जबकि निवर्तमान प्रभारी भूपेश बघेल को असम स्थानांतरित कर दिया गया है। इस बदलाव को पार्टी की ओर से पंजाब में जारी आंतरिक गुटबाजी को खत्म कर संगठन को मजबूत करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। पायलट को 'संकटमोचक' की छवि वाला नेता माना जाता है और पार्टी आलाकमान को उम्मीद है कि उनकी सांगठनिक क्षमता पंजाब इकाई में नई जान फूंकेगी। सचिन पायलट को पंजाब की जिम्मेदारी सौंपने का फैसला काफी मायने रखता है। राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ लंबे चले सत्ता संघर्ष के बावजूद पायलट ने पार्टी के प्रति निष्ठा बनाए रखी और हाल के दिनों में उन्हें केंद्रीय संगठन में अहम भूमिकाएं दी गई हैं। पंजाब कांग्रेस लंबे समय से पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह, नवजोत सिंह सिद्धू और प्रताप सिंह बाजवा जैसे नेताओं की खींचतान का शिकार रही है, जिसका खामियाजा पार्टी को पिछले विधानसभा चुनाव में भुगतना पड़ा था। पायलट के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन गुटों को एकजुट कर 2027 के लिए मजबूत जमीन तैयार करना होगा। वहीं, छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पंजाब प्रभारी पद से हटाकर असम का प्रभारी बनाया गया है। बघेल को पंजाब का प्रभार उस वक्त दिया गया था जब पार्टी वहां गहरे संकट में थी, लेकिन उनका कार्यकाल अपेक्षित परिणाम नहीं दे सका। असम में कांग्रेस लंबे समय से सत्ता से बाहर है और वहां भाजपा का वर्चस्व है। बघेल के सामने असम में संगठन को पुनर्जीवित करने की कठिन चुनौती होगी। उनके साथ ही वरिष्ठ नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला को गुजरात का प्रभार सौंपा गया है, जहां पार्टी को नए सिरे से खड़ा करना है। इस फेरबदल के जरिए कांग्रेस ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह 2027 के चुनावी चक्र के लिए अभी से कमर कस रही है। पार्टी उन राज्यों पर खास ध्यान दे रही है जहां उसका आधार कमजोर हुआ है या जहां आंतरिक कलह ने नुकसान पहुंचाया है। पायलट की नियुक्ति को युवा नेतृत्व पर भरोसे के साथ-साथ क्षेत्रीय संतुलन साधने की कवायद के रूप में भी देखा जा रहा है। पार्टी के विभिन्न धड़ों ने इस फैसले का स्वागत किया है, जिससे एकजुटता का संदेश जाता है। कुल मिलाकर, कांग्रेस का यह कदम संगठन में नई ऊर्जा भरने और चुनावी राज्यों में रणनीतिक नेतृत्व तैनात करने की दिशा में उठाया गया एक ठोस प्रयास है। सचिन पायलट के कंधों पर पंजाब जैसे संवेदनशील राज्य की जिम्मेदारी डालकर पार्टी ने बड़ा दांव खेला है। आने वाले महीनों में उनकी कार्यशैली और गुटों को साधने की क्षमता ही तय करेगी कि 2027 में पंजाब में कांग्रेस अपनी खोई जमीन वापस पा सकेगी या नहीं।

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✍️ By Pradeep Yadav | 06 Sep 2026