राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में सोमवार को एक बहुमंजिला इमारत अचानक ढह जाने से हड़कंप मच गया। इस हादसे में दर्जनों लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है। घटना दोपहर करीब बारह बजे हुई जब इमारत का एक हिस्सा भरभराकर गिर पड़ा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार धमाके की आवाज के साथ इमारत का बड़ा हिस्सा जमीन पर आ गिरा, जिससे आसपास के क्षेत्र में धूल का गुबार छा गया। स्थानीय निवासियों ने तुरंत पुलिस और दमकल विभाग को सूचना दी, जिसके बाद बचाव दल मौके पर पहुंचे। बचाव कार्य में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), दिल्ली पुलिस, दमकल विभाग और स्थानीय प्रशासन की टीमें लगी हुई हैं। खास बात यह है कि आसपास के कॉलेजों के छात्र भी बड़ी संख्या में मलबा हटाने और घायलों को निकालने में मदद कर रहे हैं। छात्रों ने मानव श्रृंखला बनाकर ईंट-पत्थर हटाए और घायलों को अस्पताल पहुंचाने में सहायता की। अब तक करीब पंद्रह लोगों को मलबे से सुरक्षित निकाला जा चुका है, जिन्हें निकट के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। गंभीर रूप से घायल तीन लोगों की हालत नाजुक बनी हुई है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटना का संज्ञान लेते हुए इमारत के मालिक के खिलाफ मामला दर्ज करने का आदेश दिया है। उन्होंने जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित की है जो इमारत की संरचनात्मक सुरक्षा, निर्माण में बरती गई लापरवाही और आवश्यक अनुमतियों की जांच करेगी। मुख्यमंत्री ने घायलों के मुफ्त इलाज की घोषणा करते हुए मृतकों के परिजनों को दस लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है। उपराज्यपाल ने भी घटनास्थल का दौरा कर बचाव कार्यों का जायजा लिया। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि इमारत काफी पुरानी थी और इसकी मरम्मत का काम चल रहा था। बिना उचित तकनीकी मार्गदर्शन के किए गए निर्माण कार्य को हादसे का मुख्य कारण माना जा रहा है। स्थानीय नगर निगम के रिकॉर्ड के अनुसार इमारत को पहले ही असुरक्षित घोषित किया गया था, लेकिन इसमें आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियां जारी रहीं। इस लापरवाही के लिए नगर निगम के अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। यह हादसा एक बार फिर शहरी क्षेत्रों में असुरक्षित इमारतों की समस्या को उजागर करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि पुरानी इमारतों का नियमित संरचनात्मक ऑडिट अनिवार्य किया जाना चाहिए। साथ ही अवैध निर्माण और बिना अनुमति के ढांचागत परिवर्तनों पर सख्त कार्रवाई की जरूरत है। बचाव कार्य अभी भी जारी है और मलबे में दबे शेष लोगों को निकालने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। प्रशासन ने प्रभावित परिवारों के लिए अस्थायी आश्रय और भोजन की व्यवस्था की है।