प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के प्रतिष्ठित श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (एसआरसीसी) में छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए राजनीति, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा पर खुलकर अपनी बात रखी। इस अवसर पर उन्होंने संस्थान की विरासत की सराहना करते हुए कहा कि एसआरसीसी ने देश को कारोबार और सार्वजनिक जीवन में कई पीढ़ियों के नेतृत्वकर्ता दिए हैं। अपने संबोधन की शुरुआत में ही उन्होंने युवा शक्ति का आह्वान किया और उन्हें विकसित भारत के निर्माण में भागीदार बनने का न्योता दिया। अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए प्रधानमंत्री ने जीडीपी के आंकड़ों का हवाला देकर कहा कि कुछ लोग निराशा फैलाने का काम कर रहे हैं, जबकि भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है। उन्होंने बिना नाम लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर 'झूठ की गूंज' फैलाने का आरोप लगाया और कहा कि देश अब 'माई-बाप' की संस्कृति से बाहर निकलकर 'जन-जन' की संस्कृति की ओर बढ़ चुका है। इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान को भी स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि भारत अपनी संप्रभुता और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा। अपने चिर-परिचित अंदाज में प्रधानमंत्री ने 13 साल पहले इसी मंच से कही गई 'आधा पानी-आधा हवा' वाली बात को दोहराते हुए आलोचकों पर व्यंग्य किया। उन्होंने विरोधियों को 'नाराज चाचा' की संज्ञा देते हुए कहा कि उनकी विरोध की आदत एक 'ओरिजिनल प्रॉब्लम' बन गई है। मोदी ने कहा कि जो लोग हर अच्छे काम में कमी निकालते हैं, वे दरअसल अपनी निराशा छिपाने का प्रयास करते हैं। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे नकारात्मकता के इस माहौल से प्रभावित हुए बिना सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ें। शिक्षा और संस्थान की भूमिका पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि एसआरसीसी जैसे संस्थान केवल डिग्री बांटने का केंद्र नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और राष्ट्र निर्माण की प्रयोगशाला हैं। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे अपने कौशल का उपयोग केवल व्यक्तिगत सफलता के लिए नहीं, बल्कि समाज और देश की समस्याओं को हल करने में करें। डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और नवाचार का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आज का भारत युवाओं को अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध है। अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने एक बार फिर दोहराया कि 2047 तक विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब देश का युवा जागृत, संकल्पित और कर्मठ होगा। उन्होंने एसआरसीसी के छात्रों और पूर्व छात्रों की उपलब्धियों पर गर्व जताते हुए उम्मीद जताई कि यह संस्थान आगे भी देश को दिशा देने वाले नेतृत्वकर्ता देता रहेगा। यह संबोधन न केवल राजनीतिक संदेशों से भरा था, बल्कि इसमें युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा और दिशा का स्पष्ट भाव भी समाहित था।