प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली स्थित श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (एसआरसीसी) के वार्षिक समारोह को संबोधित करते हुए इस प्रतिष्ठित संस्थान की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि एसआरसीसी ने व्यवसाय, सार्वजनिक जीवन और विभिन्न क्षेत्रों में पीढ़ी दर पीढ़ी नेतृत्वकर्ता तैयार किए हैं। प्रधानमंत्री ने संस्थान के गौरवशाली इतिहास और राष्ट्र निर्माण में इसके योगदान को रेखांकित करते हुए छात्रों से आह्वान किया कि वे अपनी क्षमताओं का उपयोग देश की प्रगति में करें। इस अवसर पर उन्होंने अपनी तेरह वर्ष पुरानी उस पंक्ति को भी दोहराया जिसमें उन्होंने कहा था कि सरकार का काम 'आधा पानी, आधा हवा' जैसा नहीं बल्कि ठोस परिणाम देने वाला होना चाहिए। अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर तीखा प्रहार करते हुए 'झूठ की गूंज' जैसे शब्दों का प्रयोग किया। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी का नाम लिए बिना उन पर निशाना साधा और कहा कि कुछ लोग झूठ फैलाकर जनता को भ्रमित करने का प्रयास करते हैं। प्रधानमंत्री ने 'माई-बाप संस्कृति' पर भी कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि पहले की सरकारें जनता को लाभार्थी मानकर चलती थीं, जबकि वर्तमान सरकार जनता को भागीदार मानती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज सरकार योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों तक पहुंचा रही है और बिचौलियों की भूमिका समाप्त कर दी गई है। अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने विपक्ष के उन आरोपों का खंडन किया जिनमें विकास दर को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने भारत को कभी 'नाजुक पांच' (फ्रैजाइल फाइव) की श्रेणी में धकेल दिया था, वे आज देश की 7.8 प्रतिशत की विकास दर को पचा नहीं पा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने आंकड़ों के साथ दावा किया कि आज भारत विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और जल्द ही तीसरे स्थान पर पहुंचने की ओर अग्रसर है। उन्होंने इस सफलता का श्रेय देश की जनता की मेहनत और सरकार की नीतियों को दिया। राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि भारत अब अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। उन्होंने कहा कि नया भारत आतंकवाद के सामने झुकने वाला नहीं है और सर्जिकल स्ट्राइक तथा एयर स्ट्राइक जैसी कार्रवाइयों ने यह सिद्ध कर दिया है। प्रधानमंत्री ने युवाओं से आग्रह किया कि वे राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ आगे बढ़ें और विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में अपनी भूमिका निभाएं। समारोह के अंत में प्रधानमंत्री ने एसआरसीसी के विद्यार्थियों और शिक्षकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह संस्थान न केवल व्यावसायिक दक्षता बल्कि राष्ट्रीय चरित्र निर्माण का भी केंद्र बने। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे नवाचार, उद्यमिता और सामाजिक दायित्व के साथ देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाएं। इस संबोधन ने जहां संस्थान के गौरव को बढ़ाया, वहीं राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर सरकार का स्पष्ट दृष्टिकोण भी सामने रखा।