📰 Kotputli News
Breaking News: श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के शताब्दी समारोह में पीएम मोदी का संबोधन: 13 साल पुराना 'आधा पानी-आधा हवा' जुमला दोहराया, विपक्ष पर साधे तीखे निशाने
🕒 3 days ago

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली स्थित प्रतिष्ठित श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (एसआरसीसी) के शताब्दी समारोह में छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए एक बार फिर अपना चर्चित 'आधा पानी-आधा हवा' वाला जुमला दोहराया। यह पंक्ति उन्होंने आज से 13 वर्ष पूर्व 2011 में गुजरात के मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए इसी कॉलेज में दिए गए अपने पहले बड़े भाषण में कही थी। प्रधानमंत्री ने तब युवाओं को संबोधित करते हुए कहा था कि गिलास को आधा भरा देखने वाले आशावादी होते हैं, लेकिन जो गिलास को आधा पानी और आधा हवा से भरा बताते हैं, वे यथार्थवादी होते हैं। इस बार भी उन्होंने इसी सोच के साथ युवाओं को व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने की सीख दी। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने एसआरसीसी की गौरवशाली परंपरा और राष्ट्र निर्माण में उसके योगदान की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इस संस्थान ने व्यापार, अर्थनीति और सार्वजनिक जीवन में कई पीढ़ियों के नेतृत्वकर्ता दिए हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, उद्योगपति राहुल बजाज और अनेक शीर्ष नौकरशाह इसी कॉलेज की देन हैं। मोदी ने छात्रों से आह्वान किया कि वे केवल डिग्री हासिल करने तक सीमित न रहें, बल्कि अपने ज्ञान का उपयोग समाज और देश की समस्याओं को सुलझाने में करें। भाषण के दौरान प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर भी करारे प्रहार किए। बिना नाम लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तंज कसते हुए उन्होंने 'झूठ की गूंज' शब्द का प्रयोग किया और कहा कि कुछ लोग बार-बार झूठ बोलकर उसे सच साबित करने की कोशिश करते हैं। उन्होंने 'माई-बाप संस्कृति' पर भी हमला बोला और कहा कि पहले की सरकारें जनता को लाभार्थी मानकर उपकार करती थीं, जबकि वर्तमान सरकार नागरिकों को अधिकार संपन्न बनाने में विश्वास रखती है। अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए उन्होंने जीडीपी आंकड़ों का हवाला दिया और भारत को विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बताया। राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते। उन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक का जिक्र करते हुए कहा कि नया भारत अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए निर्णायक कदम उठाने से नहीं हिचकता। युवाओं से उन्होंने कहा कि वे देश की सुरक्षा और प्रगति में अपनी भूमिका निभाएं। प्रधानमंत्री का यह संबोधन शिक्षा, अर्थनीति, राजनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे विविध आयामों को छूता हुआ एक व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। अपने उद्बोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने छात्रों से आग्रह किया कि वे 'विकसित भारत 2047' के संकल्प को साकार करने में अपना योगदान दें। उन्होंने कहा कि आज का युवा ही कल का निर्माता है और उसकी ऊर्जा, नवाचार और संकल्पशक्ति ही भारत को विकसित राष्ट्र बनाएगी। एसआरसीसी के शताब्दी वर्ष में दिया गया यह भाषण न केवल संस्थान के गौरवशाली अतीत को याद करता है, बल्कि युवा पीढ़ी को भविष्य की चुनौतियों और अवसरों के लिए तैयार होने का आह्वान भी करता है।

Stay connected with Kotputli News for latest updates.


📲 Share on WhatsApp
✍️ By Pradeep Yadav | 05 Sep 2026