दिल्ली की एक अदालत ने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज को एक दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने भारद्वाज को गिरफ्तार किया था, जिसमें उन पर अपने नाम का दुरुपयोग करने और घृणा फैलाने वाले पोस्ट डालने का आरोप लगाया गया है। अदालत में शिकायतकर्ता के वकील ने भारद्वाज की हिरासत की मांग करते हुए कहा कि उनके खिलाफ गंभीर आरोप हैं और जांच के लिए पुलिस हिरासत जरूरी है। इस मामले ने सोशल मीडिया पर प्रभावशाली लोगों की जिम्मेदारी और कानूनी जवाबदेही पर बहस छेड़ दी है। चिराग पासवान ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि स्वतंत्र भारद्वाज ने उनके नाम और तस्वीर का गलत इस्तेमाल करके भ्रामक सामग्री प्रसारित की, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा। पुलिस के अनुसार, भारद्वाज के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है, जिसमें मानहानि, घृणा फैलाने और सार्वजनिक शांति भंग करने के आरोप शामिल हैं। गिरफ्तारी के बाद भारद्वाज को ड्यूटी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, जहां पुलिस ने उनकी सात दिन की हिरासत मांगी थी, लेकिन अदालत ने केवल एक दिन की हिरासत मंजूर की। एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, स्वतंत्र भारद्वाज का विवादों से पुराना नाता रहा है। उन पर पहले भी मारपीट, पॉडकास्ट के दौरान अभद्र भाषा का प्रयोग और सोशल मीडिया पर नफरत भरे पोस्ट डालने के आरोप लग चुके हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार, भारद्वाज खुद को एक इन्फ्लुएंसर बताते हैं और उनके सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में फॉलोअर्स हैं। टेलीग्राफ इंडिया की पड़ताल में सामने आया है कि उनके कई राजनेताओं के साथ फोटो और सरकारी कार्यक्रमों में आमंत्रण के रिकॉर्ड भी मिले हैं, जिससे उनके राजनीतिक संबंधों पर सवाल उठ रहे हैं। इस मामले ने डिजिटल युग में अभिव्यक्ति की आजादी और उसकी सीमाओं पर महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए हैं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया पर प्रभाव रखने वालों की जिम्मेदारी आम नागरिकों से ज्यादा होती है, क्योंकि उनकी बातें लाखों लोगों तक पहुंचती हैं। दिल्ली पुलिस अब भारद्वाज के फोन, लैपटॉप और सोशल मीडिया अकाउंट्स की फोरेंसिक जांच कर रही है, ताकि उनके द्वारा प्रसारित की गई आपत्तिजनक सामग्री के स्रोत और मकसद का पता लगाया जा सके। अदालत का यह फैसला उन सभी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के लिए एक कड़ा संदेश है जो अपनी पहुंच का गलत इस्तेमाल करते हैं। चिराग पासवान के कार्यालय ने बयान जारी कर कहा कि वे कानून के दायरे में रहकर अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। वहीं, भारद्वाज के समर्थकों ने इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला बताया है। आने वाले दिनों में इस मामले की सुनवाई और पुलिस जांच के नतीजे तय करेंगे कि सोशल मीडिया पर जिम्मेदार व्यवहार की कानूनी व्याख्या क्या होगी।