नेपाल के त्रिशुली इलाके में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के 11 दिन बाद एक चीनी नागरिक को सुरंग से जिंदा निकालने में बचाव दलों को बड़ी सफलता मिली है। यह घटना प्राकृतिक आपदा के बीच मानवीय दृढ़ता और बचाव अभियानों की अद्भुत मिसाल बनकर उभरी है। चीनी नागरिक, जो एक जलविद्युत परियोजना में कार्यरत था, गत 16 अगस्त को आई भीषण बाढ़ के बाद सुरंग के अंदर फंस गया था। लगातार बारिश, मलबा और विषम परिस्थितियों के बावजूद नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल और चीनी बचाव दल के संयुक्त प्रयासों ने इस असंभव से लगने वाले कार्य को संभव कर दिखाया। बचाव अभियान बेहद जटिल और जोखिम भरा था। सुरंग का एक बड़ा हिस्सा मलबे और पानी से भरा हुआ था, जिससे अंदर पहुंचना लगभग नामुमकिन था। बचावकर्मियों ने भारी मशीनरी और मैन्युअल खुदाई का सहारा लेकर मलबा हटाया और ऑक्सीजन पाइप के जरिए अंदर फंसे व्यक्ति तक जीवनरक्षक सामग्री पहुंचाई। इस दौरान एक महिला समेत दो अन्य लोगों को भी अलग-अलग स्थानों से जिंदा निकाला गया, जिससे बचाव दलों का हौसला बढ़ा। चीनी दूतावास और नेपाल सरकार के बीच तालमेल ने इस ऑपरेशन को गति दी। पीड़ित चीनी नागरिक की पहचान गान यू के रूप में हुई है, जो 11 दिनों तक अंधेरे, ठंड और भूख-प्यास का सामना करते हुए जिंदा रहा। उसके जीवित रहने को चिकित्सकीय चमत्कार माना जा रहा है। निकालने के तुरंत बाद उसे हेलीकॉप्टर से काठमांडू के एक अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है। इस घटना ने उन 100 से अधिक लापता लोगों के परिजनों में भी एक नई उम्मीद जगाई है, जिनकी तलाश अभी भी जारी है। इस त्रासदी में नेपाल में अब तक 200 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि दर्जनों लापता हैं। बाढ़ ने त्रिशुली नदी घाटी में भारी तबाही मचाई, जिससे कई गांव, राजमार्ग और जलविद्युत परियोजनाएं तबाह हो गईं। सरकार ने राहत और पुनर्वास कार्यों को तेज कर दिया है, लेकिन दूरदराज के इलाकों तक पहुंचना अभी भी चुनौती बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय सहायता भी नेपाल पहुंचने लगी है। यह बचाव अभियान न केवल तकनीकी दक्षता बल्कि मानवीय संवेदना और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का प्रतीक है। इसने दिखाया है कि घोर निराशा के क्षणों में भी आशा की किरण बाकी रहती है। नेपाल सरकार और बचाव एजेंसियों का यह प्रयास सराहनीय है, लेकिन भविष्य में ऐसी आपदाओं से निपटने के लिए पूर्व चेतावनी प्रणाली और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की सख्त जरूरत है।