दिल्ली के जंतर मंतर पर एक दलित युवक की खोपड़ी फाड़ देने का दावा करने वाले हिंदुत्व इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। सिटीजंस फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए भारद्वाज के खिलाफ हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि आरोपी ने सोशल मीडिया पर खुलेआम कबूला है कि उसने एक दलित व्यक्ति की खोपड़ी तोड़ दी, इसके बावजूद पुलिस ने अब तक उसे गिरफ्तार नहीं किया। इस घटना ने सामाजिक न्याय और कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला तब और गंभीर हो गया जब केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। पासवान ने आरोप लगाया कि भारद्वाज उनके नाम का दुरुपयोग कर रहा था और खुद को उनका करीबी बता रहा था। द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, पासवान ने स्पष्ट किया कि उनका भारद्वाज से कोई संबंध नहीं है और ऐसे तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी ने जंतर मंतर पर प्रदर्शन के दौरान एक दलित व्यक्ति पर हमला किया था और बाद में सोशल मीडिया पर इसका वीडियो शेयर करते हुए लिखा था - "खोपड़ी फाड़ दी, जेल नहीं गया"। इस घटना के सामने आने के बाद CJP और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया। द वायर की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शनकारियों के दबाव के बाद दिल्ली पुलिस ने आश्वासन दिया है कि आरोपी को 72 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया जाएगा। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच चल रही है और सबूतों के आधार पर उचित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाएगा। हालांकि, प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस जानबूझकर कार्रवाई में देरी कर रही है और आरोपी को बचाने की कोशिश कर रही है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, स्वतंत्र भारद्वाज खुद को हिंदुत्व कार्यकर्ता और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर बताता है। उसके सोशल मीडिया पर हजारों फॉलोअर्स हैं और वह अक्सर विवादित बयान देता रहा है। इस घटना ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर नफरत फैलाने वाले कंटेंट और ऐसे इन्फ्लुएंसर्स की जवाबदेही पर बहस छेड़ दी है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब कोई खुलेआम अपराध कबूल करता है और पुलिस तब भी कार्रवाई नहीं करती, तो यह न्याय व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमजोर करता है। इस पूरे प्रकरण ने दलित उत्पीड़न, हेट स्पीच और सोशल मीडिया की जवाबदेही जैसे गंभीर मुद्दों को फिर से सामने ला दिया है। CJP और अन्य नागरिक समाज संगठनों की मांग है कि इस मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाया जाए और आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। साथ ही, ऐसे तत्वों को संरक्षण देने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। अब सबकी निगाहें दिल्ली पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं - देखना होगा कि 72 घंटे का आश्वासन कितना वास्तविक साबित होता है।