बेल्जियम के प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर डी क्रू ने अपनी भारत यात्रा के दौरान कहा कि यूरोप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चेतावनी को थोड़ी देर से समझ रहा है। उन्होंने मुंबई में एक कार्यक्रम में स्पष्ट किया कि वैश्विक व्यापार में उभरते खतरों के प्रति यूरोपीय देशों को अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है। इस बयान को चीन की बढ़ती आर्थिक दबदबे और अमेरिका की संरक्षणवादी नीतियों के संदर्भ में देखा जा रहा है। डी क्रू ने एंटवर्प-ब्रूज बंदरगाह को भारत के यूरोप प्रवेश द्वार के रूप में पेश किया और कहा कि यह बंदरगाह भारतीय निर्यातकों के लिए लॉजिस्टिक लागत कम कर सकता है। उन्होंने बिना नाम लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के शुल्क नीतियों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि एकतरफा शुल्क लगाने से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बाधित होती है। बेल्जियम के प्रधानमंत्री ने मुक्त व्यापार समझौते की दिशा में तेजी लाने का आह्वान किया। यात्रा के दौरान दोनों देशों की कंपनियों ने रक्षा क्षेत्र में कई अहम समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इनमें रॉकेट प्रणाली, ड्रोन तकनीक और टैंक टर्रेट के संयुक्त विकास व उत्पादन शामिल हैं। भारतीय रक्षा मंत्रालय और बेल्जियम की प्रमुख रक्षा फर्मों के बीच हुए ये करार 'मेक इन इंडिया' को नई गति देंगे और दोनों देशों की सैन्य क्षमता बढ़ाएंगे। जानकारों का मानना है कि बेल्जियम के प्रधानमंत्री का यह दौरा यूरोप की भारत के प्रति बदलती रणनीति को दर्शाता है। चीन के 'बेल्ट एंड रोड' पहल और हिंद-प्रशांत में उसकी आक्रामकता के बीच यूरोपीय देश भारत को विश्वसनीय साझेदार के रूप में देख रहे हैं। बेल्जियम, जो यूरोपीय संघ का मुख्यालय भी है, भारत-यूरोप संबंधों को मजबूत करने में सेतु का काम कर सकता है। कुल मिलाकर, यह यात्रा व्यापार, प्रौद्योगिकी और रक्षा सहयोग के नए अध्याय की शुरुआत करती है। प्रधानमंत्री मोदी की दूरदर्शी नीतियों और बेल्जियम की व्यावहारिक दृष्टिकोण का मेल दोनों देशों की जनता के लिए समृद्धि ला सकता है। आने वाले दिनों में दोनों पक्षों के बीच उच्च स्तरीय संवाद और ठोस परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर नजर रहेगी।