उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में बनी एक मस्जिद को प्रशासन ने अतिक्रमण बताकर रातोंरात बुलडोजर से ढहा दिया। इस कार्रवाई के बाद से इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है। प्रशासन का दावा है कि यह निर्माण सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करके किया गया था, जिसके खिलाफ लंबे समय से कार्यवाही लंबित थी। वहीं, समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने इस कार्रवाई को एकतरफा और अलोकतांत्रिक बताते हुए कड़ा विरोध जताया है। सहारनपुर के कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित इस मस्जिद को लेकर प्रशासन का कहना है कि यह भूमि राजस्व विभाग की है और यहां बिना अनुमति के निर्माण किया गया था। जिला प्रशासन ने अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत भारी पुलिस बल और पीएसी की तैनाती के बीच बुलडोजर चलाकर ढांचे को ध्वस्त कर दिया। यह कार्रवाई शनिवार देर रात से रविवार तड़के तक चली, जिसकी भनक तक स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों को नहीं लगने दी गई। प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद रखते हुए पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया है। इस घटना की जानकारी मिलते ही सपा सांसद इकरा हसन मौके पर पहुंचने के लिए निकलीं, लेकिन पुलिस ने उन्हें उनके आवास पर ही नजरबंद कर दिया। सांसद ने आरोप लगाया कि प्रशासन भाजपा सरकार के इशारे पर मुस्लिम समुदाय को निशाना बना रहा है और कानून का दुरुपयोग कर रहा है। उन्होंने कहा कि बिना किसी पूर्व सूचना और कानूनी प्रक्रिया का पालन किए रात के अंधेरे में धार्मिक स्थल को तोड़ना संविधान की भावना के विरुद्ध है। सपा ने इस मुद्दे को विधानसभा से लेकर संसद तक उठाने की चेतावनी दी है। जिलाधिकारी ने प्रेस वार्ता में स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई उच्च न्यायालय के आदेश और राजस्व संहिता के प्रावधानों के तहत की गई है। उन्होंने बताया कि संबंधित पक्ष को कई बार नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। प्रशासन ने किसी भी प्रकार की अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है। सोशल मीडिया पर भी निगरानी बढ़ा दी गई है। फिलहाल इलाके में धारा 144 लागू कर दी गई है और भारी पुलिस बल तैनात है। इस घटना ने एक बार फिर अतिक्रमण हटाने के नाम पर होने वाली कार्रवाइयों की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां प्रशासन इसे कानूनी प्रक्रिया बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे सांप्रदायिक रंग देने का आरोप लगा रहा है। आने वाले दिनों में यह मामला तूल पकड़ सकता है और राजनीतिक सरगर्मी बढ़ने के आसार हैं। शांति व्यवस्था बनाए रखना अब प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी।