राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों में बीते दिनों हुई मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। सड़कें तालाब में तब्दील हो गईं, वाहन घंटों फंसे रहे और हवाई अड्डे तक पर जलभराव ने यात्रियों की मुश्किलें बढ़ा दीं। मौसम विज्ञान विभाग ने आज भी भारी बारिश की चेतावनी देते हुए येलो अलर्ट जारी किया है, जिससे प्रशासन और नागरिकों की चिंता और बढ़ गई है। इस बारिश ने नगर निगम की तैयारियों की पोल खोलकर रख दी है। दोपहर के समय हुई तेज बारिश के कारण इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल क्षेत्र में पानी भर गया, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं, द्वारका एक्सप्रेसवे पर कांग्रेस के एक सांसद घंटों जाम में फंसे रहे और उन्होंने इस परियोजना की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया। उनका आरोप था कि करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद सड़कें पहली ही बारिश में धंस गईं। सोशल मीडिया पर हवाई अड्डे से लेकर कनॉट प्लेस तक के कई वीडियो वायरल हो रहे हैं, जो जलभराव की भयावह तस्वीर पेश कर रहे हैं। ट्रैफिक पुलिस के अनुसार, शहर के प्रमुख मार्गों जैसे रिंग रोड, मथुरा रोड, आईटीओ, धौला कुआं और गुरुग्राम-दिल्ली सीमा पर वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं। कई अंडरपास पानी में डूब जाने के कारण उन्हें यातायात के लिए बंद करना पड़ा। गुरुग्राम, नोएडा, फरीदाबाद और गाजियाबाद में भी हालात बेहद खराब रहे। स्कूली बच्चों और दफ्तर जाने वालों को घंटों इंतजार करना पड़ा। कई निचली बस्तियों में पानी घरों के अंदर घुस गया, जिससे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा। आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को देखते हुए दिल्ली की नागरिक व्यवस्था पर वैश्विक नजरें टिकी हुई हैं। ऐसे में बारिश से उपजी अव्यवस्था ने प्रशासनिक तालमेल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जल निकासी प्रणाली की कमी और अनियोजित शहरीकरण ही इस संकट के मूल कारण हैं। नगर निगम और लोक निर्माण विभाग अब पंपों की मदद से पानी निकालने में जुटे हैं, लेकिन लगातार बारिश के पूर्वानुमान ने राहत कार्यों को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। मौसम विभाग ने अगले चौबीस घंटों तक मध्यम से भारी बारिश का अनुमान जताते हुए नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। प्रशासन ने निचले इलाकों में रहने वालों को सुरक्षित स्थानों पर जाने को कहा है। स्कूलों में अवकाश घोषित करने पर विचार किया जा रहा है। इस संकट ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि बुनियादी ढांचे के विकास के साथ-साथ जल प्रबंधन और आपदा तैयारी पर गंभीरता से ध्यान देना होगा, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न उत्पन्न हो।