नेपाल के सिंधुपालचौक जिले में स्थित एक जलविद्युत परियोजना की सुरंग में भयानक बाढ़ के बाद दो मजदूर पूरे नौ दिन तक जिंदा बचे रहना किसी चमत्कार से कम नहीं है। भारी बारिश और अचानक आई बाढ़ ने सुरंग के प्रवेश द्वार को पूरी तरह बंद कर दिया था, जिससे ये दोनों श्रमिक अंदर ही फंस गए थे। बचाव दलों ने कठिन परिस्थितियों में दिन-रात एक करके आखिरकार उन्हें सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इस घटना ने न केवल मानव सहनशक्ति की मिसाल पेश की है, बल्कि आपदा प्रबंधन और बचाव कार्यों की चुनौतियों को भी उजागर किया है। घटना बीते सप्ताह की है जब मूसलाधार बारिश के कारण नदी में अचानक बाढ़ आ गई और इसका पानी जलविद्युत परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग में घुस गया। सुरंग के अंदर काम कर रहे कई मजदूरों में से दो - राम बहादुर तामांग और शेर बहादुर गुरुंग - गहरे हिस्से में फंस गए जबकि अन्य किसी तरह बाहर निकलने में कामयाब रहे। बाढ़ का पानी और मलबा सुरंग के मुहाने को पूरी तरह बंद कर चुका था, जिससे बाहर से कोई संपर्क या सहायता पहुंचना असंभव हो गया था। इन दोनों ने नौ दिनों तक अंधेरे, ठंड और भोजन-पानी के अभाव में अपनी जान बचाए रखी। बचाव अभियान बेहद जटिल और जोखिम भरा था। नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल और स्थानीय बचाव दलों ने मिलकर कई दिनों तक मलबा हटाने और सुरंग में प्रवेश का रास्ता बनाने का प्रयास किया। भारी मशीनरी और विशेषज्ञ गोताखोरों की मदद ली गई, लेकिन बार-बार भूस्खलन और जलस्तर बढ़ने से काम बाधित होता रहा। इस दौरान मजदूरों के परिजन और स्थानीय लोग सुरंग के बाहर डेरा डाले रहे, प्रार्थनाएं करते हुए किसी चमत्कार की आस में। आखिरकार नौवें दिन बचावकर्मी एक संकरा रास्ता बनाने में सफल हुए और दोनों मजदूरों तक पहुंच पाए। बाहर आने पर दोनों मजदूर बेहद कमजोर और निर्जलित थे, लेकिन होश में थे। उन्हें तुरंत हेलीकॉप्टर से काठमांडू के अस्पताल ले जाया गया जहां उनका इलाज चल रहा है। डॉक्टरों के अनुसार उनकी हालत स्थिर है और वे धीरे-धीरे ठीक हो रहे हैं। इन मजदूरों ने बताया कि उन्होंने सुरंग में जमा बारिश के पानी को पीकर और दीवारों पर उगे काई-लाइकेन को खाकर खुद को जिंदा रखा। उनका आपसी हौसला और जीवट ही उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया और सोशल मीडिया पर उनकी बहादुरी के किस्से वायरल हो रहे हैं। इस घटना ने जलविद्युत परियोजनाओं में सुरक्षा मानकों और आपातकालीन तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। नेपाल सरकार ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े दिशानिर्देश बनाने की बात कही है। साथ ही बचाव दलों के अदम्य साहस और समन्वय की सराहना करते हुए उन्हें सम्मानित करने की घोषणा की गई है। दो जिंदगियों का नौ दिनों तक मौत को मात देना न केवल उनके परिवारों के लिए बल्कि पूरे राष्ट्र के लिए आशा और प्रेरणा का स्रोत बन गया है।