राजधानी दिल्ली में नागरिक अधिकार संगठन 'सिटीजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस' (सीजेपी) के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान हुई एक हिंसक घटना ने सनसनी फैला दी है। प्रसिद्ध हिंदुत्व इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज पर आरोप है कि उन्होंने प्रदर्शन में शामिल एक छात्रा के पिता पर सरेआम हमला बोल दिया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया है। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि हमला पूर्व नियोजित था और आरोपी ने घटना के तुरंत बाद बेहद आपत्तिजनक टिप्पणियां करते हुए अपनी करतूत को सही ठहराने का प्रयास किया। इस घटना ने अभिव्यक्ति की आजादी और असहमति के स्वर को दबाने के प्रयासों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के विवरण के अनुसार, सीजेपी के कार्यकर्ता संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए जंतर-मंतर क्षेत्र में एकत्रित हुए थे। इसी दौरान स्वतंत्र भारद्वाज वहां पहुंचे और एक छात्रा के पिता से उलझ पड़े। आरोप है कि भारद्वाज ने न केवल उनके साथ मारपीट की, बल्कि घटना के बाद कैमरे पर बेखौफ होकर कहा कि "जरूरत पड़ी तो फिर करूंगा"। इतना ही नहीं, एक अन्य वीडियो में उन्हें यह दावा करते सुना गया कि उन्होंने उस व्यक्ति की "खोपड़ी फोड़ दी" है। इन बयानों ने आरोपी के हिंसक इरादों को स्पष्ट रूप से उजागर कर दिया। पीड़ित की बेटी जो स्वयं प्रदर्शन का हिस्सा थी, ने रोते हुए पूरी घटना का बयान किया और आरोपी की तुरंत गिरफ्तारी की गुहार लगाई। हालांकि, मामला तूल पकड़ने और चौतरफा निंदा होने के बाद आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज के सुर बदले नजर आए। उन्होंने अपने पूर्व के बयानों से पलटी मारते हुए दावा किया कि उन्होंने "आत्मरक्षा" में यह कदम उठाया था। भारद्वाज ने कहा कि उन्हें घेरा गया था और भीड़ ने उन पर हमला करने का प्रयास किया, जिसके चलते उन्हें बचाव में हाथ उठाना पड़ा। उनके इस नए दावे को पीड़ित पक्ष और सीजेपी के कार्यकर्ताओं ने सिरे से खारिज करते हुए इसे कानूनी कार्रवाई से बचने का एक हथकंडा बताया है। संगठन की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि वीडियो साक्ष्य स्पष्ट रूप से दिखाते हैं कि हमला एकतरफा और उकसावे की कार्रवाई थी। इस घटना को लेकर सीजेपी और अन्य नागरिक समाज संगठनों ने दिल्ली पुलिस मुख्यालय के समक्ष जोरदार प्रदर्शन किया और आरोपी की अविलंब गिरफ्तारी की मांग उठाई। पीड़ित की बेटी ने दावा किया है कि पुलिस ने उन्हें आश्वासन दिया है कि आरोपी को 72 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया जाएगा। फिलहाल पुलिस ने संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह मामला अब केवल मारपीट का नहीं रह गया है, बल्कि यह वैचारिक असहिष्णुता और कानून को हाथ में लेने की बढ़ती प्रवृत्ति का प्रतीक बन गया है। समाज के प्रबुद्ध वर्ग की निगाहें अब पुलिस की कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी हैं, ताकि कानून का राज स्थापित हो सके।