नागरिक अधिकार संगठन 'सिटीजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस' (सीजेपी) के कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को दिल्ली के संसद मार्ग थाने के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग हिंदुत्ववादी इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज की तत्काल गिरफ्तारी है, जिस पर एक छात्र के पिता के साथ बर्बर मारपीट करने का आरोप है। संगठन की सचिव तीस्ता सीतलवाड़ के नेतृत्व में जुटे सैकड़ों लोगों ने पुलिस प्रशासन पर निष्क्रियता का आरोप लगाते हुए नारेबाजी की और ज्ञापन सौंपकर कानूनी कार्रवाई तेज करने की मांग उठाई। यह पूरा मामला पिछले दिनों सामने आए एक वीडियो से जुड़ा है, जिसमें स्वतंत्र भारद्वाज को एक व्यक्ति के साथ मारपीट करते और बाद में उसकी खोपड़ी फोड़ देने का दावा करते हुए देखा गया था। पीड़ित व्यक्ति जामिया मिलिया इस्लामिया के एक छात्र के पिता बताए जाते हैं। वीडियो वायरल होने के बाद आरोपी ने सोशल मीडिया पर न सिर्फ अपनी करतूत कबूली, बल्कि उसने खुलेआम धमकी भरे लहजे में कहा कि यदि वैसी स्थिति फिर बनी तो वह दोबारा ऐसा ही करेगा। इस बयान ने मामले को और तूल दे दिया और सामाजिक संगठनों ने इसे सुनियोजित नफरत भरा हमला करार दिया। हालांकि, विवाद बढ़ता देख आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज ने बाद में अपने बयान से पलटी मारते हुए इसे 'आत्मरक्षा' में उठाया गया कदम बताया। उसने दावा किया कि पीड़ित पक्ष ने ही उस पर हमला किया था, इसलिए उसे मजबूरन जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी। लेकिन सीजेपी समेत कई मानवाधिकार संगठनों ने इस सफाई को झूठा और बाद में गढ़ा गया बताया है। उनका कहना है कि शुरुआती वीडियो और आरोपी के खुद के कबूलनामे से साफ है कि यह एकतरफा हमला था, जिसे सांप्रदायिक विद्वेष से प्रेरित होकर अंजाम दिया गया। प्रदर्शन के दौरान सीजेपी ने दिल्ली पुलिस पर आरोपी को बचाने का आरोप लगाते हुए कहा कि घटना के कई दिन बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। संगठन ने मांग की कि भारतीय दंड संहिता की गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर आरोपी को तुरंत गिरफ्तार किया जाए। साथ ही, ऐसे नफरत भरे बयान देने वाले सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स पर नकेल कसने के लिए सख्त दिशानिर्देश जारी किए जाएं। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि इंसाफ में देरी हुई तो आंदोलन को देशव्यापी रूप दिया जाएगा।