नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। ताजा आंकड़ों के अनुसार इस प्राकृतिक आपदा में मरने वालों की संख्या 1,259 तक पहुंच गई है, जबकि 5,000 से अधिक लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। त्रिशूली नदी के किनारे बसे गांवों और कस्बों में तबाही का मंजर इतना भयावह है कि बरसों से राहत कार्यों में लगे अनुभवी कर्मचारी भी इस तबाही के पैमाने को देखकर स्तब्ध हैं। 'ग्रीन हाउस' के मालिक ने अपनी जीवित बचने की कहानी साझा करते हुए कहा कि 'हमें दूसरा जीवन मिला है', जो इस त्रासदी की भयावहता को बयां करता है। इस भीषण बाढ़ ने नेपाल के कई जिलों को अपनी चपेट में ले लिया है, जहां लगातार बारिश और भूस्खलन ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। त्रिशूली नदी के उफान ने आसपास के इलाकों में घरों, पुलों और सड़कों को बहा दिया है। प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर चल रहे हैं, लेकिन दुर्गम पहाड़ी इलाके और खराब मौसम बचाव दलों के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं। लापता लोगों की तलाश में ड्रोन और हेलीकॉप्टरों की मदद ली जा रही है, लेकिन मलबे और कीचड़ में दबे शवों को निकालना बेहद मुश्किल साबित हो रहा है। इस त्रासदी का सबसे मार्मिक पहलू उन परिवारों का दर्द है जिनके अपने लापता हैं। त्रिशूली नदी के किनारे कई परिवारों ने अपने लापता परिजनों के लिए प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार किए हैं, जिसे स्थानीय भाषा में 'नकली अंतिम संस्कार' कहा जा रहा है। ये परिवार अब भी इस उम्मीद में हैं कि शायद उनके अपने जीवित लौट आएं, लेकिन समय बीतने के साथ यह उम्मीद धूमिल होती जा रही है। राहत शिविरों में शरण लिए हजारों लोग भोजन, पानी और दवाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जबकि सरकार और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां मदद पहुंचाने की भरसक कोशिश कर रही हैं। 'ग्रीन हाउस' के मालिक की आपबीती इस त्रासदी की भयावहता को सामने लाती है। उन्होंने बताया कि कैसे बाढ़ का पानी पलक झपकते ही उनके पूरे घर और कारोबार को निगल गया। वे और उनका परिवार किसी तरह छत पर चढ़कर जान बचा पाए। उनके शब्दों में, 'यह ऐसा मंजर था जैसे प्रलय आ गई हो। पानी का बहाव इतना तेज था कि कुछ भी समझ नहीं आ रहा था। हम बस प्रार्थना कर रहे थे। आज हमें लगता है कि हमें दूसरा जीवन मिला है।' उनकी कहानी उन हजारों लोगों की कहानी है जो इस आपदा में सब कुछ गंवा चुके हैं। नेपाल सरकार ने राष्ट्रीय आपदा घोषित करते हुए अंतरराष्ट्रीय सहायता की अपील की है। भारत, चीन और अन्य पड़ोसी देशों ने राहत सामग्री और बचाव दल भेजे हैं। प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया है और मृतकों के परिजनों को मुआवजे का ऐलान किया है। हालांकि, इस त्रासदी ने नेपाल की आपदा प्रबंधन तैयारियों पर भी सवाल खड़े किए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसी चरम मौसमी घटनाएं बढ़ रही हैं, और नेपाल जैसे पहाड़ी देशों को दीर्घकालिक योजना बनाने की सख्त जरूरत है।