पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है जब ईरान ने दावा किया कि उसने संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल हमले किए हैं। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने बयान जारी कर कहा कि ये हमले ईरान के सिरीक क्षेत्र में एक शादी समारोह पर हुए अमेरिकी हवाई हमले के जवाब में किए गए हैं, जिसमें कई निर्दोष नागरिकों की मौत हो गई थी। इस घटनाक्रम ने खाड़ी क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात पैदा कर दिए हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय गहरी चिंता में है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, सिरीक में हुए अमेरिकी हमले को उन्होंने 'युद्ध अपराध' करार दिया है, जिसमें एक विवाह समारोह को निशाना बनाया गया था। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, इस हमले में महिलाओं और बच्चों समेत कई लोग मारे गए। ईरान के विदेश मंत्रालय ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को पत्र लिखकर इस घटना की कड़ी निंदा की है और अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग की है। वहीं, अमेरिका ने नागरिकों को निशाना बनाने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उसका हमला ईरान समर्थित आतंकी ठिकानों पर था। अल जज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार, सिरीक में हुए हमले के तुरंत बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई की घोषणा की थी। आईआरजीसी के कमांडरों ने कहा कि उन्होंने 'दुश्मन के ठिकानों' पर सटीक मिसाइल हमले किए हैं। संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत दोनों ही खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के सदस्य हैं और वहां अमेरिकी सैन्य अड्डे मौजूद हैं। इस घटनाक्रम ने खाड़ी देशों की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है, क्योंकि वे नहीं चाहते कि उनका क्षेत्र अमेरिका और ईरान के बीच टकराव का मैदान बने। एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक, इस ताजा घटनाक्रम ने 1980 के दशक के खाड़ी युद्ध की यादें ताजा कर दी हैं। विश्लेषकों का मानना है कि अगर तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो यह पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर सकता है और वैश्विक तेल आपूर्ति पर भी असर डाल सकता है। द इकॉनमिस्ट ने अपनी रिपोर्ट में इसे 'खाड़ी युद्ध की वापसी' करार दिया है। अंतरराष्ट्रीय शक्तियां दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील कर रही हैं, लेकिन जमीनी हालात बता रहे हैं कि टकराव और बढ़ सकता है। इस संकट ने एक बार फिर पश्चिम एशिया की नाजुक सुरक्षा व्यवस्था को उजागर किया है। जहां एक ओर ईरान अपनी संप्रभुता और नागरिकों की रक्षा के नाम पर जवाबी हमले को जायज ठहरा रहा है, वहीं अमेरिका आतंकवाद विरोधी अभियान के नाम पर अपनी कार्रवाई का बचाव कर रहा है। खाड़ी देश इस आग में झुलसने से बचने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज कर रहे हैं। आने वाले दिनों में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाई जा सकती है। दुनिया की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या कूटनीति इस टकराव को रोक पाएगी या क्षेत्र एक और विनाशकारी युद्ध की ओर बढ़ रहा है।