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Breaking News: नेपाल जलविद्युत संयंत्र में फंसे मजदूरों के जीवित होने की उम्मीद, बचाव अभियान तेज
🕒 6 days ago

नेपाल के एक जलविद्युत संयंत्र की सुरंग में फंसे दर्जनों मजदूरों के जीवित होने की प्रबल संभावना जताई गई है। अधिकारियों के अनुसार, ग्लेशियर टूटने के कारण आई अचानक बाढ़ के बावजूद सुरंग के अंदर हवा और पानी की उपलब्धता बनी हुई है, जिससे बचाव दलों का हौसला बढ़ा है। यह घटना नेपाल की आपदा प्रबंधन प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है, क्योंकि ग्लेशियर टूटने के 38 मिनट बाद चेतावनी जारी की गई थी। घटना स्थल पर बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल और स्थानीय प्रशासन की संयुक्त टीमें सुरंग तक पहुंचने के लिए मलबा हटाने में जुटी हैं। अधिकारियों ने बताया कि सुरंग के अंदर फंसे मजदूरों तक ऑक्सीजन और भोजन पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। मौसम खराब होने और भारी बारिश के कारण बचाव अभियान में बाधा आ रही है, लेकिन टीमें लगातार प्रयासरत हैं। इस त्रासदी ने हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरों को उजागर किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्लेशियरों का तेजी से पिघलना और अचानक टूटना भविष्य में ऐसी और घटनाओं का कारण बन सकता है। नेपाल सरकार ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सहयोग की अपील की है, साथ ही चीन, अमेरिका और भारत जैसे बड़े देशों से जलवायु न्याय के तहत मुआवजे की मांग भी उठाई गई है। बाढ़ की विभीषिका का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मरने वालों की संख्या 1,250 के करीब पहुंच गई है, जबकि 4,000 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं। प्रभावित क्षेत्रों में राहत शिविर स्थापित किए गए हैं, जहां विस्थापित परिवारों को भोजन, पानी और चिकित्सा सुविधा मुहैया कराई जा रही है। सरकार ने मृतकों के परिजनों और घायलों के लिए मुआवजे की घोषणा की है। इस आपदा ने बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की सुरक्षा समीक्षा की आवश्यकता पर बल दिया है। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली को मजबूत करने, ग्लेशियरों की निगरानी बढ़ाने और आपदा प्रबंधन प्रोटोकॉल को सख्ती से लागू करने की जरूरत है। बचाव अभियान की सफलता न केवल फंसे मजदूरों के जीवन के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह नेपाल की आपदा प्रतिक्रिया क्षमता की परीक्षा भी है।

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✍️ By Pradeep Yadav | 03 Sep 2026