अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर विवादास्पद बयान देते हुए विश्व के सबसे महत्वपूर्ण सामरिक जलमार्ग होरमुज जलडमरूमध्य का नाम बदलकर अपने नाम पर 'ट्रंप जलडमरूमध्य' रखने का सुझाव दिया है। यह बयान उन्होंने हाल ही में एक बैठक के दौरान दिया जब ईरान के साथ तनाव चरम पर है। ट्रंप का मानना है कि चूंकि अमेरिका इस क्षेत्र की सुरक्षा पर भारी खर्च करता है, इसलिए इस जलमार्ग का नामकरण अमेरिकी नेतृत्व को प्रतिबिंबित करना चाहिए। इस प्रस्ताव ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। होरमुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ता है तथा विश्व के कुल तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा यहीं से गुजरता है। इस संकीर्ण जलमार्ग की चौड़ाई मात्र 39 किलोमीटर है, जिसके कारण यह वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत संवेदनशील बिंदु है। ट्रंप ने तर्क दिया कि अमेरिकी नौसेना दशकों से इस मार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करती आई है, इसलिए इसका नाम अमेरिका के सबसे प्रमुख नेता के नाम पर होना उचित होगा। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र की संधियों के अनुसार किसी भी अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग का नामकरण एकतरफा नहीं किया जा सकता। व्हाइट हाउस ने ट्रंप के इस सुझाव पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया कि यह पूर्व राष्ट्रपति का व्यक्तिगत विचार है और वर्तमान प्रशासन की आधिकारिक नीति नहीं दर्शाता। प्रेस सचिव ने कहा कि अमेरिका अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभु राष्ट्रों के अधिकारों का सम्मान करता है तथा किसी भी भौगोलिक नामकरण में एकतरफा बदलाव का समर्थन नहीं करता। व्हाइट हाउस ने यह भी दोहराया कि होरमुज जलडमरूमध्य वैश्विक साझा संपत्ति है और इसकी सुरक्षा सामूहिक जिम्मेदारी है। यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान के साथ तनाव नए सिरे से बढ़ गया है। हाल ही में ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड ने तीन लाख बयासी हजार लीटर ईंधन ले जा रहे एक जहाज को जब्त कर लिया और ग्यारह विदेशी नागरिकों को हिरासत में ले लिया। ईरान का आरोप है कि यह जहाज अवैध रूप से ईंधन की तस्करी कर रहा था। इस घटना ने क्षेत्र में नौसैनिक गतिविधियों को तेज कर दिया है और अमेरिका ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर समुद्री सुरक्षा अभियान बढ़ा दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान घरेलू राजनीति को ध्यान में रखकर दिया गया है, लेकिन इसके अंतरराष्ट्रीय निहितार्थ गंभीर हो सकते हैं। ईरान पहले ही इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बता चुका है और अन्य खाड़ी देशों ने भी सतर्क प्रतिक्रिया दी है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय का स्पष्ट मत है कि ऐसे संवेदनशील भू-राजनीतिक मुद्दों पर एकतरफा बयानबाजी से तनाव बढ़ने का खतरा रहता है। फिलहाल, होरमुज जलडमरूमध्य अपने ऐतिहासिक नाम से ही जाना जाता रहेगा, लेकिन इस प्रकरण ने एक बार फिर दिखा दिया है कि वैश्विक ऊर्जा मार्गों पर नियंत्रण और नामकरण की राजनीति कितनी जटिल है।