पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है जब अमेरिका ने ईरान के तीन ठिकानों पर भीषण हवाई हमले किए, जिसमें कम से कम 11 लोगों की मौत हो गई। इन हमलों में सबसे अधिक चिंताजनक घटना एक शादी समारोह पर हुआ हमला है, जिसमें बच्चों सहित चार नागरिकों की जान चली गई। ईरान ने इस घटना को 'युद्ध अपराध' करार देते हुए कड़ी निंदा की है, जबकि अमेरिका ने नागरिकों को निशाना बनाने के आरोपों से इनकार किया है। इस ताजा घटनाक्रम ने क्षेत्र में पूर्ण युद्ध की आशंकाओं को फिर से हवा दे दी है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरान के तीन अलग-अलग सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, जिसके परिणामस्वरूप 11 लोगों की मौत हुई और कई अन्य घायल हो गए। सबसे दुखद घटना एक ग्रामीण इलाके में आयोजित शादी समारोह के दौरान हुई, जहां मिसाइल हमले में मासूम बच्चों सहित चार नागरिक मारे गए। ईरान के विदेश मंत्रालय ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का घोर उल्लंघन बताते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में शिकायत दर्ज कराने की बात कही है। वहीं, अमेरिकी रक्षा विभाग ने दावा किया है कि उनके हमले केवल ईरान समर्थित आतंकवादी समूहों के ठिकानों पर थे और नागरिक हताहत अनजाने में हुए। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस तनाव को और भड़काते हुए बयान दिया है कि अमेरिका अभी भी ईरान को 'सबक सिखा सकता है'। उनके इस बयान से क्षेत्र में अमेरिकी नीति की निरंतरता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला खामेनेई ने प्रतिक्रिया में चेतावनी दी है कि ईरान अपनी रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा। सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि ईरान सीधे टकराव के बजाय अपने क्षेत्रीय सहयोगियों के माध्यम से अमेरिकी हितों को निशाना बना सकता है, जिसमें इराक, सीरिया और लेबनान में मौजूद अमेरिकी ठिकाने शामिल हो सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने तनाव कम करने के लिए बातचीत का आह्वान किया है, जबकि यूरोपीय संघ ने परमाणु समझौते को पुनर्जीवित करने के प्रयासों को तेज करने की बात कही है। रूस और चीन ने अमेरिकी हमलों की निंदा करते हुए इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बताया है। भारत ने भी दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने और कूटनीतिक माध्यमों से विवाद सुलझाने का अनुरोध किया है, साथ ही भारतीय नागरिकों को क्षेत्र में सतर्क रहने की सलाह दी है। इस संकट का समाधान केवल कूटनीति और संवाद के माध्यम से ही संभव है। दोनों देशों के बीच दशकों से चले आ रहे अविश्वास को दूर करने के लिए अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता की आवश्यकता है। यदि तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो इसके विनाशकारी परिणाम न केवल दोनों देशों बल्कि पूरे वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकते हैं। विश्व समुदाय को चाहिए कि वह तत्काल हस्तक्षेप कर युद्ध की विभीषिका को टाले और क्षेत्र में स्थायी शांति की दिशा में ठोस कदम उठाए।