📰 Kotputli News
Breaking News: नेपाल में प्रलयंकारी बाढ़: 1,250 के पार पहुंचा मौत का आंकड़ा, 4 हजार से अधिक लापता, बचाव अभियान जारी
🕒 6 days ago

नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। पिछले सप्ताह हुई मूसलाधार बारिश और भूस्खलन के कारण आई इस प्रलयंकारी बाढ़ में मरने वालों की संख्या 1,250 के करीब पहुंच गई है, जबकि 4,000 से अधिक लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। इस त्रासदी ने नेपाल के कई जिलों को पूरी तरह तबाह कर दिया है, जहां गांव के गांव मलबे में दब गए हैं और सड़कें, पुल तथा संचार व्यवस्था पूरी तरह ठप पड़ गई है। प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' ने इसे देश के इतिहास की सबसे भयावह प्राकृतिक आपदा करार दिया है। बचाव दल दिन-रात एक करके सुरंगों और मलबे में फंसे जीवित बचे लोगों तक पहुंचने की जद्दोजहद में लगे हुए हैं। आपदा के एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी राहत कार्य में तेजी लाई जा रही है। सेना, सशस्त्र पुलिस बल और स्वयंसेवकों की टीमें हेलीकॉप्टरों की मदद से दुर्गम इलाकों में राहत सामग्री पहुंचा रही हैं। एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के अनुसार, हेलीकॉप्टर से नेपाल की घाटियों का हवाई सर्वेक्षण करने पर तबाही का ऐसा मंजर दिखा जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। पूरे इलाके में मलबा, उखड़े पेड़ और बह गए घरों के अवशेष बिखरे पड़े हैं। इस बीच नेपाल सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर जलवायु मुआवजे की मांग उठाई है। नेपाल के एक मंत्री ने चीन, अमेरिका और भारत जैसे प्रमुख उत्सर्जक देशों से जलवायु परिवर्तन के कारण आई इस आपदा के लिए मुआवजे की मांग की है। हालांकि प्रधानमंत्री प्रचंड ने तुरंत भारत और चीन की ओर से भेजी गई त्वरित सहायता के लिए दोनों पड़ोसी देशों का आभार व्यक्त किया है। भारत ने ऑपरेशन मैत्री के तहत राहत सामग्री, दवाएं और बचाव दल भेजे हैं, जबकि चीन ने भी आपातकालीन सहायता मुहैया कराई है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में भी भारी बारिश की संभावना बनी हुई है, जिससे बचाव कार्यों में और बाधा आ सकती है। लापता लोगों की तलाश के लिए खोजी कुत्तों और आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है। अस्थायी राहत शिविरों में हजारों विस्थापित परिवार शरण लिए हुए हैं, जहां भोजन, स्वच्छ पानी और चिकित्सा सुविधाओं की भारी किल्लत है। अंतरराष्ट्रीय सहायता एजेंसियों ने भी नेपाल की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है। इस भयावह त्रासदी ने जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरों को एक बार फिर रेखांकित किया है। हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों के पिघलने और अनियमित मानसून पैटर्न के कारण ऐसी आपदाओं की आशंका बढ़ गई है। नेपाल सरकार को अब पुनर्निर्माण की लंबी और कठिन प्रक्रिया से गुजरना होगा। अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मिल रही सहायता और जलवायु न्याय की मांग इस बात का संकेत है कि वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से निपटने के लिए सामूहिक प्रयासों की सख्त जरूरत है।

Stay connected with Kotputli News for latest updates.


📲 Share on WhatsApp
✍️ By Pradeep Yadav | 02 Sep 2026