अमेरिका द्वारा ईरान पर नए सिरे से किए गए हवाई हमलों के बाद मध्य पूर्व में तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कड़ी चेतावनियों को दरकिनार करते हुए ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इन हमलों का मुंहतोड़ जवाब देगा। ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि 'पछतावे भरी प्रतिक्रिया' शुरू हो चुकी है, जिससे क्षेत्र में बड़े संघर्ष की आशंका गहरा गई है। होरमुज जलडमरूमध्य में जहाजरानी पर हुए हमलों के जवाब में अमेरिकी सेना ने एक महीने में पहली बार ईरानी ठिकानों पर सीधी सैन्य कार्रवाई की है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने पुष्टि की है कि ईरान समर्थित समूहों द्वारा वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाए जाने के बाद ईरान में कई सैन्य ठिकानों पर हमले किए गए। वहीं, ईरानी राज्य टेलीविजन ने सिरिक क्षेत्र में एक शादी समारोह पर हुए हमले में चार लोगों के मारे जाने की खबर दी है, जिससे स्थानीय स्तर पर आक्रोश भड़क उठा है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों का घोर उल्लंघन बताते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाने की मांग की है। राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर धमकी भरे लहजे में कहा था कि अगर ईरान ने जवाबी कार्रवाई की तो उसे 'बहुत भारी कीमत' चुकानी पड़ेगी। इसके बावजूद ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के कमांडरों ने कहा है कि अमेरिकी धमकियां उन्हें रोक नहीं सकतीं। ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला खामेनेई के सलाहकारों ने संकेत दिया है कि प्रतिक्रिया सोची-समझी और सटीक होगी, जिसका समय और स्थान ईरान खुद तय करेगा। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस बढ़ते टकराव को लेकर गहरी चिंता में है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने दोनों पक्षों से अधिकतम संयम बरतने की अपील की है, जबकि यूरोपीय देशों ने तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज कर दिए हैं। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखा जा रहा है, क्योंकि होरमुज जलडमरूमध्य से होकर वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। खाड़ी के देशों ने अपने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह जारी की है। विश्लेषकों का मानना है कि यह टकराव यदि पूर्ण युद्ध में तब्दील होता है तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय स्थिरता पर विनाशकारी होगा। दोनों तरफ से बयानबाजी और सैन्य तैयारी जारी है, लेकिन पर्दे के पीछे कूटनीतिक चैनल भी सक्रिय बताए जा रहे हैं। आने वाले दिन तय करेंगे कि क्या यह संकट बातचीत की मेज तक पहुंचता है या फिर विध्वंसक युद्ध की ओर बढ़ता है। दुनिया की निगाहें अब दोनों देशों के अगले कदम पर टिकी हैं।