मुंबई के बांद्रा इलाके में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां फोन पर बात करते हुए तेज रफ्तार से कार चला रही एक महिला ने 8 वर्षीय बालक को कुचल दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। यह हादसा रविवार शाम को उस समय हुआ जब बच्चा सड़क किनारे खेल रहा था। घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोगों ने महिला ड्राइवर को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया है और उसके खिलाफ लापरवाही से वाहन चलाने और गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, महिला अपनी इनोवा SUV को तेज गति से चला रही थी और लगातार मोबाइल फोन पर बात कर रही थी। उसकी लापरवाही का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसने न तो ब्रेक लगाने की कोशिश की और न ही हॉर्न बजाया। बच्चे को टक्कर मारने के बाद भी कार कुछ दूरी तक घिसटती चली गई। घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया और गुस्साए लोगों ने सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन किया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस उपायुक्त (जोन 9) ने बताया कि आरोपी महिला की पहचान 38 वर्षीय निवासी के रूप में हुई है। उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 279 (लापरवाही से वाहन चलाना), 304ए (लापरवाही से मौत) और मोटर वाहन अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। महिला का मेडिकल टेस्ट भी कराया गया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं वह नशे में तो नहीं थी। पुलिस सीसीटीवी फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर जांच को आगे बढ़ा रही है। इस घटना ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और वाहन चलाते समय मोबाइल फोन के इस्तेमाल के खतरों को उजागर किया है। यातायात विशेषज्ञों का कहना है कि ड्राइविंग के दौरान फोन पर बात करना नशे में गाड़ी चलाने से भी ज्यादा खतरनाक है क्योंकि इससे ड्राइवर का ध्यान पूरी तरह भटक जाता है। महाराष्ट्र सरकार ने इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कानून बनाए हैं, लेकिन जागरूकता की कमी और लापरवाही के कारण ऐसे हादसे थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। मृतक बच्चे के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उसके माता-पिता मजदूरी कर परिवार चलाते थे और यह बच्चा उनकी इकलौती संतान था। स्थानीय नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने और आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की मांग की है। यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी है कि यातायात नियमों का पालन केवल कानूनी बाध्यता नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी भी है। एक पल की लापरवाही ने एक मासूम की जान ले ली और एक परिवार को जिंदगी भर का दर्द दे दिया।