नेपाल में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है, जिसमें अब तक 788 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर गए तीर्थयात्रियों ने किसी तरह अपनी जान बचाई, लेकिन वे उस खौफनाक मंजर को भुला नहीं पा रहे। एक तीर्थयात्री ने रोते हुए बताया कि यदि वे एक दिन और रुक जाते तो शायद जिंदा नहीं बचते। नदियों का जलस्तर अचानक बढ़ने से कई गांव पूरी तरह बह गए और लोग अपने घरों के मलबे में दब गए। बचाव कार्य में लगी टीमों को शवों को सुरक्षित रखने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस प्राकृतिक आपदा ने नेपाल के कई जिलों को अपनी चपेट में ले लिया है। द गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार, बाढ़ पीड़ित जब अपने घरों के अवशेष देखने लौटे तो उनकी आंखों में आंसू थे। एक स्थानीय निवासी ने कहा, "नदी सब कुछ बहा ले गई।" अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) ने इसे 2026 का सबसे बड़ा मलबा हिमस्खलन और अचानक आई बाढ़ बताया है। सड़कें, पुल और बिजली के खंभे पूरी तरह ध्वस्त हो गए हैं, जिससे राहत सामग्री पहुंचाने में बाधा आ रही है। बॉलीवुड अभिनेत्री मनीषा कोइराला ने नेपाल की इस त्रासदी पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मदद की भावुक अपील की है। आंसू रोकते हुए उन्होंने कहा, "क्या इस दर्द को कम नहीं किया जा सकता? कृपया, भगवान।" उन्होंने पर्यटन न घटाने का आग्रह करते हुए कहा कि नेपाल को इस वक्त सहयोग की सबसे ज्यादा जरूरत है। नेपाल सरकार और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां मिलकर राहत और बचाव अभियान चला रही हैं, लेकिन संसाधनों की कमी और खराब मौसम इसमें बाधा बन रहे हैं। द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, बरामद शवों को सुरक्षित रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है। शवगृहों में जगह नहीं बची है और पहचान करना मुश्किल हो रहा है। डीएनए टेस्टिंग और अन्य वैज्ञानिक तरीकों का सहारा लिया जा रहा है। मृतकों के परिजन अपनों की तलाश में भटक रहे हैं। सरकार ने मृतकों के परिवारों को मुआवजा देने की घोषणा की है, लेकिन पुनर्वास एक लंबी प्रक्रिया होगी। इस त्रासदी ने जलवायु परिवर्तन और अनियोजित विकास के खतरों को फिर से उजागर किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि हिमालय क्षेत्र में ग्लेशियर पिघलने और भारी बारिश के कारण ऐसी घटनाएं बढ़ेंगी। नेपाल को दीर्घकालिक योजना और बुनियादी ढांचे के मजबूत निर्माण पर ध्यान देना होगा। अंतरराष्ट्रीय सहयोग और तकनीकी मदद से ही नेपाल इस संकट से उबर सकेगा। पीड़ितों के पुनर्वास और भविष्य में ऐसी आपदाओं से निपटने की तैयारी अब सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।