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Breaking News: हिमाचल प्रदेश में 67 संवेदनशील हिमनद झीलों की पहचान, चार के लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली की योजना
🕒 1 week ago

हिमाचल प्रदेश सरकार ने जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरे को देखते हुए एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए प्रदेश में 67 संवेदनशील हिमनद झीलों की पहचान की है। यह कवायद हिमालय क्षेत्र में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (जीएलओएफ) जैसी विनाशकारी आपदाओं से निपटने की तैयारी का हिस्सा है। वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की टीमों द्वारा किए गए विस्तृत सर्वेक्षण के बाद इन झीलों को जोखिम की श्रेणी में रखा गया है, जिनमें से चार झीलों को अत्यधिक संवेदनशील मानते हुए वहां तत्काल प्रभाव से प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली स्थापित करने की योजना बनाई गई है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, इन चिह्नित झीलों में से अधिकांश लाहौल-स्पीति, किन्नौर और चंबा के दुर्गम उच्च हिमालयी क्षेत्रों में स्थित हैं। बढ़ते तापमान के कारण ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने से इन झीलों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे उनके प्राकृतिक बांध टूटने का खतरा बना रहता है। विगत वर्षों में सिक्किम और उत्तराखंड में आई भीषण बाढ़ की घटनाओं ने इस खतरे को और स्पष्ट कर दिया है। इसे देखते हुए हिमाचल सरकार ने रिमोट सेंसिंग तकनीक और सैटेलाइट इमेजरी का उपयोग कर इन झीलों की निरंतर निगरानी शुरू कर दी है। चिह्नित की गई चार सर्वाधिक संवेदनशील झीलों के लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली (अर्ली वार्निंग सिस्टम) स्थापित करने का कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है। इस प्रणाली में सेंसर, ऑटोमेटेड वेदर स्टेशन और सायरन लगाए जाएंगे जो जलस्तर में असामान्य वृद्धि या भूकंपीय गतिविधि का पता चलते ही नीचे बसे गांवों और प्रशासन को तत्काल अलर्ट जारी कर देंगे। इसके अलावा, राज्य सरकार ने राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) के साथ मिलकर संवेदनशील गांवों में मॉक ड्रिल और जागरूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया है, ताकि आपात स्थिति में जनहानि को न्यूनतम किया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल चेतावनी प्रणाली ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि दीर्घकालिक रणनीति के तहत इन झीलों से पानी निकालने (साइफनिंग) के इंजीनियरिंग समाधानों पर भी कार्य करना होगा। हाल ही में 'द हिंदू' और 'इंडियन एक्सप्रेस' जैसी प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में प्रकाशित रिपोर्ट्स ने 'हैंगिंग ग्लेशियर्स' यानी लटकते ग्लेशियरों के खतरे को भी रेखांकित किया है, जो हिमाचल के लिए नई चुनौती बनकर उभरे हैं। इसके अलावा, टेलीग्राफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, हिमालय की पारिस्थितिकी को बचाने के लिए भारत, नेपाल और चीन के बीच संयुक्त निगरानी तंत्र विकसित करने की मांग भी जोर पकड़ रही है। निष्कर्षतः, हिमाचल प्रदेश द्वारा 67 संवेदनशील झीलों की पहचान और चार के लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली की स्थापना एक सराहनीय और समयोचित पहल है। हालांकि, जलवायु परिवर्तन की अप्रत्याशित गति को देखते हुए इस दिशा में निरंतर निवेश, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और स्थानीय समुदायों की भागीदारी अनिवार्य है। भविष्य में होने वाली किसी भी त्रासदी को टालने के लिए विज्ञान, प्रशासन और समाज के समन्वित प्रयास ही हिमालय की रक्षा का एकमात्र मार्ग हैं।

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✍️ By Pradeep Yadav | 30 Aug 2026