प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा ने दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को नया आयाम दिया है। ताशकंद में आयोजित एक भव्य समारोह में उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शवकत मिर्जियोयेव ने प्रधानमंत्री मोदी को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'ओलिय दारजाली दोस्तलिक' (उच्च श्रेणी का मित्रता आदेश) से सम्मानित किया। यह सम्मान भारत और उज्बेकिस्तान के बीच गहरी होती दोस्ती और बहुआयामी सहयोग का प्रतीक है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह सम्मान 140 करोड़ भारतीयों का सम्मान है और यह दोनों देशों की साझा विरासत तथा भविष्य की आकांक्षाओं को दर्शाता है। यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने ताशकंद में पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की समाधि पर श्रद्धांजलि अर्पित की और उनकी स्मृति में एक पौधा भी लगाया। उज्बेक राष्ट्रपति मिर्जियोयेव भी इस भावुक क्षण में उनके साथ मौजूद रहे। शास्त्री जी ने 1966 में ताशकंद समझौते के दौरान इसी शहर में अंतिम सांस ली थी। प्रधानमंत्री ने इसे ऐतिहासिक क्षण बताते हुए कहा कि शास्त्री जी की शांति और साहस की विरासत आज भी भारत-उज्बेक संबंधों का मार्गदर्शन करती है। दोनों नेताओं ने संयुक्त रूप से 'शास्त्री-मिर्जियोयेव मैत्री पार्क' का उद्घाटन भी किया। दोनों देशों ने रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए। दीर्घकालिक यूरेनियम आपूर्ति समझौता ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। इसके अलावा रक्षा सहयोग, कनेक्टिविटी, फार्मास्यूटिकल्स, आईटी और कृषि जैसे क्षेत्रों में संयुक्त कार्य समूहों के गठन पर सहमति बनी। अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (आईएनएसटीसी) के माध्यम से चाबहार बंदरगाह का उपयोग कर व्यापार मार्गों को सुगम बनाने पर भी विस्तृत चर्चा हुई। व्यापारिक संबंधों को नई गति देते हुए दोनों पक्षों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 5 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा। वर्तमान में यह व्यापार लगभग 600 मिलियन डॉलर का है, जिसमें उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है। प्रधानमंत्री मोदी ने उज्बेकिस्तान को भारत की 'विस्तारित पड़ोस नीति' का महत्वपूर्ण स्तंभ बताते हुए कहा कि मध्य एशिया में शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए दोनों देश मिलकर कार्य करेंगे। गृह मंत्री अमित शाह ने इस सम्मान को प्रत्येक भारतीय के लिए 'गर्व का ऐतिहासिक क्षण' करार दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा निरंतर बढ़ रही है। उज्बेकिस्तान द्वारा दिया गया यह सर्वोच्च सम्मान न केवल प्रधानमंत्री की कूटनीतिक कुशलता का परिचायक है, बल्कि यह 'वसुधैव कुटुंबकम' की भारतीय अवधारणा की वैश्विक स्वीकृति का भी प्रमाण है। यह यात्रा निश्चित रूप से भारत-मध्य एशिया संबंधों में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ेगी।