प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी दो दिवसीय उज्बेकिस्तान यात्रा को सफलतापूर्वक संपन्न करते हुए शुक्रवार को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक के लिए प्रस्थान किया, जहां वे शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। उज्बेकिस्तान यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को राष्ट्रपति शवकत मिर्जियोयेव ने विदेशी नेताओं के लिए उज्बेकिस्तान के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'ऑर्डर ऑफ द गोल्डन स्टार' से सम्मानित किया। यह सम्मान दोनों देशों के बीच प्रगाढ़ होते संबंधों का प्रतीक है। यात्रा के दौरान भारत और उज्बेकिस्तान ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' के स्तर तक उन्नत करने की घोषणा की, जो मध्य एशिया क्षेत्र में भारत की बढ़ती राजनयिक पकड़ को दर्शाता है। उज्बेकिस्तान यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम दीर्घकालिक यूरेनियम आपूर्ति समझौता रहा, जो भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद अहम है। दोनों देशों ने परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग के लिए यूरेनियम की निरंतर आपूर्ति पर सहमति जताई। इसके अलावा रक्षा सहयोग, व्यापार व निवेश, कनेक्टिविटी, संस्कृति और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर कई समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर हुए। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मिर्जियोयेव ने क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति, अफगानिस्तान के हालात और आतंकवाद के खिलाफ साझा लड़ाई पर भी गहन चर्चा की। दोनों नेताओं ने चाबहार बंदरगाह और अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) के माध्यम से कनेक्टिविटी बढ़ाने पर जोर दिया। उज्बेकिस्तान में ऐतिहासिक उपलब्धियों के बाद प्रधानमंत्री मोदी बिश्केक पहुंच गए हैं, जहां 15-16 जून को SCO शिखर सम्मेलन आयोजित हो रहा है। इस सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ सहित अन्य सदस्य देशों के नेता भाग ले रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी शिखर सम्मेलन से इतर कई द्विपक्षीय बैठकें करेंगे, जिनमें क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी सहयोग, व्यापार और कनेक्टिविटी पर चर्चा होगी। भारत SCO का सक्रिय सदस्य है और संगठन के ढांचे के तहत मध्य एशियाई देशों के साथ सहयोग को गहरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह यात्रा भारत की 'मध्य एशिया नीति' में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुई है। उज्बेकिस्तान के साथ रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई देना और फिर SCO मंच पर क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करना, भारत की बहुआयामी कूटनीति को दर्शाता है। यूरेनियम आपूर्ति समझौता जहां ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करता है, वहीं रक्षा और कनेक्टिविटी समझौते सामरिक हितों को साधते हैं। SCO शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री की भागीदारी क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और समृद्धि के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराएगी। यह दौरा न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगा, बल्कि विस्तारित पड़ोस में भारत के प्रभाव को भी बढ़ाएगा।