कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने उत्तराखंड के हल्द्वानी में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद आयोजन स्थल के 'शुद्धिकरण' के मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधा हस्तक्षेप करने और अनुसूचित जाति/जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने का आदेश देने की मांग की है। राहुल गांधी ने इस घटना को संविधान और दलित समुदाय के सम्मान पर सीधा हमला करार देते हुए कहा कि 'शुद्धिकरण' छुआछूत का ही दूसरा नाम है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और आरएसएस की मानसिकता दलितों के प्रति भेदभावपूर्ण रही है और यह घटना उसी सोच का प्रतिबिंब है। कांग्रेस नेता ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रधानमंत्री को इस मामले में चुप्पी तोड़नी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए। यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की एक जनसभा के बाद, कथित तौर पर भाजपा कार्यकर्ताओं और स्थानीय पुजारियों द्वारा उस स्थान पर गंगाजल छिड़ककर 'शुद्धिकरण' किया गया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राजनीतिक भूचाल आ गया। कांग्रेस का आरोप है कि चूंकि खड़गे दलित समुदाय से आते हैं, इसलिए भाजपा नेताओं ने उनकी रैली के बाद उस स्थान को 'अपवित्र' मानकर उसका शुद्धिकरण किया, जो संविधान द्वारा प्रदत्त समानता के अधिकार का घोर उल्लंघन है। पार्टी ने इसे दलित अस्मिता पर हमला बताते हुए देशव्यापी विरोध की चेतावनी दी है। वहीं, भाजपा ने कांग्रेस के इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे झूठ और राजनीतिक साजिश करार दिया है। भाजपा का कहना है कि वह स्थान एक मंदिर परिसर के निकट था और वहां धार्मिक अनुष्ठान के तहत गंगाजल छिड़का गया था, इसका खड़गे की जाति से कोई लेना-देना नहीं है। पार्टी प्रवक्ताओं ने कांग्रेस पर जातिवाद की राजनीति करने और तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप लगाया। हालांकि, कांग्रेस ने भाजपा के स्पष्टीकरण को अस्वीकार करते हुए कहा कि अगर यह सामान्य धार्मिक क्रिया थी तो इसे विशेष रूप से खड़गे की रैली के तुरंत बाद ही क्यों किया गया? इस मामले ने उत्तराखंड की राजनीति को गरमा दिया है। राज्य में दलित मतदाताओं की अच्छी-खासी संख्या को देखते हुए दोनों दल इस मुद्दे को भुनाने में लगे हैं। कांग्रेस ने जहां इसे आगामी चुनावों में प्रमुख मुद्दा बनाने का संकेत दिया है, वहीं भाजपा डैमेज कंट्रोल में जुटी है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस मामले में SC/ST एक्ट के तहत FIR दर्ज होती है तो यह एक बड़ा कानूनी और राजनीतिक संदेश देगा। राहुल गांधी की प्रधानमंत्री से सीधी अपील इस मामले को राष्ट्रीय स्तर पर ले आई है, जिससे केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ गया है। निष्कर्षतः, हल्द्वानी का 'शुद्धिकरण' प्रकरण महज एक स्थानीय घटना न रहकर राष्ट्रीय विमर्श का विषय बन चुका है। यह घटना भारतीय समाज में जातिगत भेदभाव की जड़ों और राजनीतिक दलों द्वारा उसके उपयोग को फिर से उजागर करती है। राहुल गांधी की FIR की मांग और भाजपा का खंडन, दोनों ही अपने-अपने वोट बैंक को साधने की कवायद का हिस्सा हैं। अब देखना यह होगा कि प्रधानमंत्री कार्यालय इस मांग पर क्या प्रतिक्रिया देता है और क्या कानूनी एजेंसियां स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई करती हैं। इस घटना का असर उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ना तय है।