राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत के न्यूयॉर्क में आयोजित होने वाले कार्यक्रम से पहले एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कार्यक्रम की मेजबानी कर रहे संगठन ने आरोप लगाया है कि उनका आधिकारिक X (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट कई घंटों के लिए ब्लॉक कर दिया गया था, जिससे कार्यक्रम संबंधी जानकारियां साझा करने में बाधा उत्पन्न हुई। हालांकि, बाद में अकाउंट को बहाल कर दिया गया, लेकिन इस घटना ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आयोजकों ने इसे सुनियोजित तरीके से आवाज दबाने का प्रयास बताया है। इस बीच, अमेरिका स्थित 61 हिंदू संगठनों के एक समूह ने मोहन भागवत के इस न्यूयॉर्क कार्यक्रम का पुरजोर विरोध किया है। इन संगठनों ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि 'आरएसएस हमारा प्रतिनिधित्व नहीं करता'। प्रदर्शनकारी संगठनों का आरोप है कि आरएसएस की विचारधारा विभाजनकारी है और यह भारतीय संविधान के धर्मनिरपेक्ष ढांचे के विपरीत है। इन संगठनों में 'हिंदूज फॉर ह्यूमन राइट्स', 'साधना: कोलिशन ऑफ प्रोग्रेसिव हिंदूज' और 'इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल' जैसे प्रमुख समूह शामिल हैं। उन्होंने न्यूयॉर्क के निर्वाचित प्रतिनिधियों से अपील की है कि वे इस कार्यक्रम में शामिल न हों और घृणा फैलाने वाली विचारधारा को मंच न दें। विरोध कर रहे संगठनों ने एक संयुक्त बयान जारी कर आरएसएस पर अल्पसंख्यकों, दलितों और महिलाओं के खिलाफ नफरत फैलाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि भागवत की यह यात्रा अमेरिका में हिंदू समुदाय को एकरूप बनाने और आरएसएस के राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने का प्रयास है। वहीं, कार्यक्रम के आयोजकों ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि यह कार्यक्रम सांस्कृतिक आदान-प्रदान और हिंदू मूल्यों के प्रचार-प्रसार के लिए है। आयोजकों ने X अकाउंट ब्लॉक होने की घटना को विरोधियों की साजिश करार देते हुए जांच की मांग की है। इस पूरे प्रकरण ने अमेरिका में भारतीय प्रवासी समुदाय के भीतर मौजूद वैचारिक मतभेदों को उजागर कर दिया है। एक तरफ जहां आरएसएस समर्थक इस कार्यक्रम को हिंदू गौरव और एकता का प्रतीक बता रहे हैं, वहीं प्रगतिशील हिंदू संगठन इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए खतरा मान रहे हैं। सोशल मीडिया पर अकाउंट ब्लॉक होने की घटना ने इस बहस को और तेज कर दिया है कि क्या बड़ी तकनीकी कंपनियां किसी खास विचारधारा के दबाव में काम कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की स्थिति पर असर डाल सकती हैं। निष्कर्षतः, मोहन भागवत की अमेरिका यात्रा और न्यूयॉर्क कार्यक्रम ने एक जटिल बहस को जन्म दे दिया है, जो केवल एक संगठन या कार्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक मंच पर हिंदू पहचान, अभिव्यक्ति की आजादी और लोकतांत्रिक मूल्यों के टकराव को दर्शाता है। X अकाउंट की ब्लॉकिंग और 61 संगठनों का विरोध, दोनों ही घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि आने वाले दिनों में यह विवाद और गहरा सकता है। अब देखना यह होगा कि आयोजक और विरोधी पक्ष, दोनों ही इस स्थिति को कैसे संभालते हैं और अमेरिकी प्रशासन एवं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इस पर क्या रुख अपनाते हैं।