अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें गुरुवार को लगभग स्थिर रहीं, लेकिन सप्ताह के अंत तक इनमें गिरावट दर्ज होने की संभावना है। अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते को लेकर जारी वार्ता में गतिरोध बना हुआ है, जिससे बाजार में अनिश्चितता का माहौल है। ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई दोनों ही मानक तेल की कीमतें पिछले कुछ सत्रों से एक दायरे में कारोबार कर रही हैं, क्योंकि निवेशक मध्य पूर्व की भू-राजनीतिक स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाए गए नए प्रतिबंधों और होरमुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों की आवाजाही में बाधा की खबरों ने आपूर्ति पक्ष की चिंताओं को बढ़ाया है। हालांकि, वार्ता में प्रगति न होने से मांग पक्ष पर दबाव बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वार्ता जल्द पटरी पर नहीं लौटती तो तेल की कीमतों में और गिरावट आ सकती है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की 'अधिकतम दबाव' नीति के तहत ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों का असर अब दिखने लगा है। ईरान की अर्थव्यवस्था गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है, लेकिन तेहरान ने तेल निर्यात के वैकल्पिक रास्ते अपनाकर और घरेलू उत्पादन बढ़ाकर खुद को संभालने का प्रयास किया है। ईरान ने चीन और अन्य एशियाई देशों को रियायती दरों पर तेल बेचकर अपने राजस्व को बनाए रखने की रणनीति अपनाई है। साथ ही, उसने परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाकर वार्ता में अपनी सौदेबाजी की ताकत बढ़ाने की कोशिश की है। इस बीच, अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने वैश्विक तेल मांग में वृद्धि का अनुमान लगाया है, जो कीमतों को निचले स्तर पर समर्थन दे सकता है। आने वाले सप्ताह में बाजार की नजर अमेरिका-ईरान वार्ता के किसी भी नतीजे, ओपेक प्लस की बैठक और वैश्विक आर्थिक आंकड़ों पर रहेगी। यदि वार्ता में सफलता मिलती है तो ईरानी तेल की बाजार में वापसी से कीमतों पर दबाव बढ़ेगा। वहीं, गतिरोध जारी रहने पर भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम कीमतों को सहारा दे सकता है।