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Breaking News: जेपी नड्डा ने आरक्षण सुधार कार्यकर्ताओं से की मुलाकात, 'आरक्षण हटाओ आंदोलन' को मिली नई धार
🕒 1 week ago

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने शुक्रवार को नई दिल्ली में आरक्षण सुधार की मांग कर रहे कार्यकर्ताओं के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। यह बैठक जंतर-मंतर पर चल रहे 'आरक्षण हटाओ आंदोलन' के प्रदर्शन के कुछ दिनों बाद हुई, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। इस मुलाकात को भाजपा की ओर से सामान्य वर्ग के मतदाताओं को साधने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, खासकर तब जब लोकसभा चुनाव नजदीक हैं। बैठक में 'आरक्षण हटाओ आंदोलन' के प्रमुख चेहरे अजीत भारती समेत कई कार्यकर्ता शामिल थे, जिन्होंने सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित आरक्षण की समीक्षा की मांग रखी। बैठक के बाद अजीत भारती ने मीडिया से बातचीत में इसे सामान्य वर्ग के खिलाफ एक साजिश करार दिया। उनका कहना था कि वर्तमान आरक्षण व्यवस्था योग्यता की उपेक्षा कर रही है और इससे सामान्य वर्ग के युवाओं के अवसर छिन रहे हैं। उन्होंने मांग की कि आर्थिक आधार पर आरक्षण दिया जाए न कि जाति के आधार पर। वहीं, भाजपा सूत्रों के अनुसार नड्डा ने कार्यकर्ताओं की बात धैर्यपूर्वक सुनी और उन्हें आश्वासन दिया कि उनकी मांगों को पार्टी के उचित मंच तक पहुंचाया जाएगा। द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक यह चर्चा 'सौहार्दपूर्ण' रही, जबकि द हिंदू ने लिखा कि यह आंदोलन अब सामान्य वर्ग के हितों का एक संगठित मंच बनता जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा इस मुलाकात के जरिए एक तीर से कई निशाने साध रही है। एक ओर वह सामान्य वर्ग के उस तबके को संदेश देना चाहती है जो आरक्षण व्यवस्था से नाराज है, तो दूसरी ओर सहयोगी दलों और पिछड़े वर्ग के मतदाताओं को नाराज न करने का संतुलन भी बनाए रखना चाहती है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व इस मुद्दे पर खुलकर बोलने से बच रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की नब्ज टटोल रहा है। द क्विंट ने अपनी पड़ताल में यह भी स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर जयपुर के एक पुराने वीडियो को दिल्ली के आरक्षण विरोधी प्रदर्शन का बताकर भ्रामक ढंग से फैलाया जा रहा है, जिससे आंदोलन की विश्वसनीयता पर सवाल उठे हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर आरक्षण नीति पर राष्ट्रीय बहस को तेज कर दिया है। जहां एक तरफ सामाजिक न्याय के पैरोकार आरक्षण को संवैधानिक अधिकार और वंचितों के सशक्तिकरण का जरिया मानते हैं, वहीं दूसरी तरफ सुधार की मांग करने वाले इसे योग्यता और समान अवसर के सिद्धांत के विरुद्ध बताते हैं। भाजपा के लिए यह मुद्दा बेहद संवेदनशील है क्योंकि उसके मूल मतदाता आधार में दोनों ही वर्ग शामिल हैं। आने वाले दिनों में देखना होगा कि पार्टी इस मांग पर कोई ठोस कदम उठाती है या फिर इसे केवल चुनावी संवाद तक सीमित रखती है। निष्कर्षतः, जेपी नड्डा की यह मुलाकात भले ही औपचारिक लगे, लेकिन इसके राजनीतिक निहितार्थ गहरे हैं। यह सामान्य वर्ग की बेचैनी को दर्शाता है और साथ ही भाजपा की उस दुविधा को भी उजागर करता है जहां उसे सामाजिक न्याय और योग्यता के बीच संतुलन साधना है। आरक्षण सुधार का यह आंदोलन अब सड़क से निकलकर सत्ता के गलियारों तक पहुंच चुका है, और इसकी आंच आगामी चुनावों में किस करवट बैठेगी, यह समय ही बताएगा।

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✍️ By Pradeep Yadav | 27 Aug 2026