उत्तर प्रदेश के कानपुर में रविवार को एक प्रशिक्षण विमान के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने से दो पायलटों की मौत हो गई। यह हादसा गंगा बैराज के निकट उस समय हुआ जब विमान नियमित प्रशिक्षण उड़ान पर था। मृतकों में एक प्रशिक्षु पायलट और एक प्रशिक्षक शामिल हैं। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, प्रशासन और विमानन अधिकारी मौके पर पहुंचे और राहत-बचाव कार्य शुरू किया। हालांकि, विमान में आग लग जाने के कारण दोनों पायलटों को बचाया नहीं जा सका। प्राप्त जानकारी के अनुसार, दुर्घटनाग्रस्त विमान एक छोटा प्रशिक्षण विमान था जो कानपुर के चकेरी हवाई अड्डे से उड़ान भरा था। उड़ान के कुछ ही मिनटों बाद विमान में तकनीकी खराबी आने की आशंका जताई जा रही है, जिसके चलते पायलट ने विमान को नियंत्रित करने का प्रयास किया लेकिन वह असफल रहा। विमान गंगा बैराज के पास खेतों में जा गिरा और तत्काल आग की लपटों में घिर गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, विमान के गिरते ही जोरदार धमाका हुआ और आसमान में काले धुएं का गुबार छा गया। घटनास्थल पर पहुंचे वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मृतकों की पहचान प्रशिक्षु पायलट और उनके प्रशिक्षक के रूप में हुई है। दोनों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने हादसे की जांच के आदेश दे दिए हैं। एक उच्च स्तरीय जांच दल मौके पर पहुंचकर विमान के मलबे की जांच कर रहा है। ब्लैक बॉक्स की तलाश भी जारी है, जिससे हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके। इस हादसे ने एक बार फिर विमानन सुरक्षा और प्रशिक्षण मानकों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कानपुर स्थित फ्लाइंग क्लब के विमानों के रखरखाव और प्रशिक्षण प्रोटोकॉल की समीक्षा की मांग उठने लगी है। विमानन विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशिक्षण उड़ानों के दौरान सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए। मृतक पायलटों के परिजनों को सूचित कर दिया गया है और उन्हें हर संभव सहायता प्रदान की जा रही है। इस दुखद घटना पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गहरा शोक व्यक्त किया है और मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। साथ ही उन्होंने जांच में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। विमानन क्षेत्र से जुड़े संगठनों ने भी इस हादसे पर चिंता जताते हुए सुरक्षा ऑडिट की मांग की है। जांच पूरी होने तक इस फ्लाइंग क्लब की प्रशिक्षण उड़ानों पर रोक लगा दी गई है।