📰 Kotputli News
Breaking News: नेपाल में भीषण बाढ़: तमिलनाडु के श्रद्धालु फंसे, 160 से अधिक मौतें, बचाव अभियान जारी
🕒 1 week ago

नेपाल में आई विनाशकारी अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है, जिसमें अब तक 160 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है जबकि 844 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं। इस भीषण आपदा में कम से कम 133 भारतीय नागरिक भी लापता हैं, जिससे भारत में भी चिंता की लहर दौड़ गई है। मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के कारण हुई भारी बारिश ने नेपाल के विभिन्न जिलों में बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति पैदा कर दी है, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। इस त्रासदी के बीच तमिलनाडु के कई श्रद्धालु नेपाल के विभिन्न इलाकों में फंसे हुए हैं, जिनमें ज्यादातर तीर्थयात्री बताए जा रहे हैं। भारत सरकार और तमिलनाडु सरकार के अधिकारी नेपाली प्रशासन के साथ लगातार समन्वय स्थापित कर फंसे हुए भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने के प्रयासों में जुटे हुए हैं। विदेश मंत्रालय ने स्थिति पर कड़ी नजर रखते हुए काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं, जबकि बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। नेपाल के गृह मंत्रालय के अनुसार, बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित जिलों में काठमांडू घाटी, सिंधुपालचौक, कावरे और नुवाकोट शामिल हैं। सड़कें और पुल बह जाने के कारण कई गांवों का संपर्क मुख्य शहरों से कट गया है, जिससे राहत सामग्री पहुंचाने में भारी दिक्कत आ रही है। नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल और स्थानीय स्वयंसेवक मिलकर बचाव अभियान चला रहे हैं, लेकिन खराब मौसम और भूस्खलन के कारण ऑपरेशन में बाधा उत्पन्न हो रही है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने इस प्राकृतिक आपदा के पीछे पश्चिमी विक्षोभ को मुख्य कारण बताया है, जिसने मानसून की सक्रियता को बढ़ाते हुए नेपाल और उत्तर भारत के पहाड़ी क्षेत्रों में रिकॉर्ड तोड़ बारिश कराई। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण इस तरह की चरम मौसमी घटनाओं की frequency और तीव्रता बढ़ रही है, जिससे हिमालयी क्षेत्र विशेष रूप से संवेदनशील बने हुए हैं। इस दुखद घड़ी में भारत ने नेपाल को हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया है, जिसमें राहत सामग्री, चिकित्सा दल और तकनीकी सहायता शामिल है। दोनों देशों की सरकारें मिलकर फंसे हुए नागरिकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए युद्धस्तर पर कार्य कर रही हैं। इस त्रासदी ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्र में बेहतर आपदा प्रबंधन प्रणाली और पूर्व चेतावनी तंत्र की आवश्यकता को रेखांकित किया है, ताकि भविष्य में जान-माल के नुकसान को कम किया जा सके।

Stay connected with Kotputli News for latest updates.


📲 Share on WhatsApp
✍️ By Pradeep Yadav | 27 Aug 2026