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Breaking News: ईरान और ओमान के बीच होरमुज जलडमरूमध्य पर ऐतिहासिक समझौता, राजस्व बंटवारे और नए मार्ग पर बनी सहमति
🕒 1 week ago

ईरान और ओमान ने होरमुज जलडमरूमध्य को लेकर लंबे समय से चले आ रहे विवाद को सुलझाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने घोषणा की है कि दोनों देशों के बीच इस रणनीतिक समुद्री मार्ग के जलक्षेत्र और उससे होने वाली आय के बंटवारे पर सहमति बन गई है। यह समझौता क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि विश्व का लगभग पांचवां हिस्सा कच्चा तेल इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। दोनों पड़ोसी मुल्कों के बीच हुई इस उच्चस्तरीय वार्ता के बाद तनाव कम होने की उम्मीद जगी है। समझौते के तहत दोनों राष्ट्रों ने होरमुज में एक नए अस्थायी समुद्री मार्ग के संचालन पर भी रजामंदी जताई है, जिसका उद्देश्य वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करना है। यह कदम हाल के महीनों में क्षेत्र में बढ़े नौसैनिक तनाव और जहाजों को जब्त किए जाने की घटनाओं के बाद उठाया गया है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, यह नया मार्ग अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग मानकों के अनुरूप होगा और इससे व्यापारिक बेड़ों को राहत मिलेगी। ओमान की मध्यस्थता को क्षेत्र में शांति स्थापित करने की दिशा में एक कूटनीतिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, इसी बीच ईरान द्वारा 45 जहाजों को कथित उल्लंघन के आरोप में काली सूची में डालने का मामला भी सामने आया है, जिसमें भारतीय और पाकिस्तानी जहाज शामिल हैं। इस कार्रवाई के बाद कम से कम तीन बड़ी भारतीय तेल कंपनियों ने ईरान की इस काली सूची में शामिल जहाजों का उपयोग न करने का निर्णय लिया है। भारतीय कंपनियों का यह कदम अपने वाणिज्यिक हितों की रक्षा और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के जोखिम से बचने के लिए एहतियातन उठाया गया है। इससे भारत-ईरान ऊर्जा व्यापार पर असर पड़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है। इस घटनाक्रम का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर तुरंत दिखाई दिया। ओमान और ईरान की वार्ता से होरमुज जलडमरूमध्य के पूरी तरह खुलने और तनाव घटने की उम्मीद में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला को स्थिरता मिलेगी और कीमतों में अस्थिरता कम होगी। मगर, जहाजों को काली सूची में डालने जैसे एकतरफा कदमों से अविश्वास का माहौल भी बन सकता है। निष्कर्षतः, ईरान और ओमान के बीच हुआ यह समझौता पश्चिम एशिया की भू-राजनीति में एक सकारात्मक मोड़ है, परंतु इसकी दीर्घकालिक सफलता दोनों पक्षों की प्रतिबद्धता और पारदर्शी कार्यान्वयन पर निर्भर करेगी। भारत जैसे प्रमुख ऊर्जा आयातक देशों के लिए यह आवश्यक है कि वे अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए विविध विकल्प तलाशते रहें और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए कूटनीतिक प्रयासों का समर्थन करें। आने वाले दिन इस बात का निर्धारण करेंगे कि होरमुज का यह नया अध्याय शांति का प्रतीक बनेगा या नए विवादों का कारण।

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✍️ By Pradeep Yadav | 26 Aug 2026