📰 Kotputli News
Breaking News: पश्चिमी विक्षोभ ने नेपाल में मचाई तबाही, बिहार-यूपी सीमा पर एनडीआरएफ हाई अलर्ट पर
🕒 1 week ago

नेपाल में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं के पीछे मौसम वैज्ञानिकों ने पश्चिमी विक्षोभ को मुख्य कारण बताया है। मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से नेपाल के पहाड़ी इलाकों में पिछले कुछ दिनों में रिकॉर्ड तोड़ बारिश दर्ज की गई, जिससे नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया। सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा हुआ है कि इस प्राकृतिक आपदा के पीछे बादल फटने की घटनाएं और अचानक आई बाढ़ प्रमुख वजह रही हैं। इस त्रासदी में अब तक सैकड़ों लोगों के मारे जाने और हजारों के विस्थापित होने की खबरें हैं, जिनमें कई विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। इतिहासकारों का मानना है कि बाढ़ से प्रभावित यह गलियारा सदियों से हिमालयी व्यापार का प्रमुख मार्ग रहा है। प्राचीन काल में इस रास्ते से तिब्बत, नेपाल और भारत के बीच नमक, ऊन, मसाले और अन्य वस्तुओं का व्यापार होता था। आज वही ऐतिहासिक मार्ग प्रकृति के प्रकोप का शिकार बना है। सड़कें, पुल और बुनियादी ढांचा पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है, जिससे राहत कार्यों में भारी दिक्कत आ रही है। नेपाल सरकार ने अंतरराष्ट्रीय सहायता की अपील की है, जबकि भारत ने तत्काल राहत सामग्री और बचाव दल भेजे हैं। भारतीय सीमा से सटे इलाकों में खतरे को देखते हुए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) को हाई अलर्ट पर रखा गया है। बिहार और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में बाढ़ की आशंका के चलते प्रशासन ने निचले इलाकों को खाली कराना शुरू कर दिया है। गंडक, कोसी और नारायणी नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। एनडीआरएफ की कई टीमें बोट और उपकरणों के साथ तैनात की गई हैं। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है, जिससे स्थिति और गंभीर हो सकती है। ब्रिटिश मीडिया की रिपोर्ट्स के अनुसार, इस आपदा में कई ब्रिटिश नागरिकों के लापता होने की खबर है। ब्रिटिश दूतावास ने अपने नागरिकों की तलाश के लिए नेपाल सरकार से सहयोग मांगा है। वहीं, नेपाल की राजधानी काठमांडू में फंसे पर्यटकों को निकालने के लिए विशेष उड़ानों का इंतजाम किया जा रहा है। प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' ने आपात बैठक बुलाकर राहत कार्यों की समीक्षा की और प्रभावित परिवारों को तत्काल मुआवजा देने की घोषणा की। इस त्रासदी ने एक बार फिर जलवायु परिवर्तन के खतरों को उजागर किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि हिमालयी क्षेत्र में पश्चिमी विक्षोभ की तीव्रता और आवृत्ति बढ़ रही है, जिससे ऐसी आपदाएं भविष्य में और अधिक हो सकती हैं। भारत-नेपाल सीमा पर बाढ़ प्रबंधन के लिए दीर्घकालिक योजना और बेहतर पूर्व चेतावनी प्रणाली की सख्त जरूरत है। दोनों देशों को मिलकर नदी जल बंटवारे और बाढ़ नियंत्रण पर ठोस समझौता करना होगा, ताकि भविष्य में जान-माल का नुकसान रोका जा सके।

Stay connected with Kotputli News for latest updates.


📲 Share on WhatsApp
✍️ By Pradeep Yadav | 26 Aug 2026