कनाडा ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नवीनतम टैरिफ के खिलाफ कड़ा कदम उठाते हुए जवाबी कार्रवाई की घोषणा की है। कनाडा सरकार ने अमेरिकी वस्तुओं पर 50 प्रतिशत तक का जवाबी शुल्क लगाने के साथ-साथ प्रभावित श्रमिकों और उद्योगों के लिए 5.4 अरब डॉलर का सहायता पैकेज भी घोषित किया है। यह कदम दोनों देशों के बीच जारी व्यापार युद्ध को एक नए स्तर पर ले गया है, जहां दोनों पक्ष एक-दूसरे के निर्यात पर भारी शुल्क लगा रहे हैं। कनाडा के प्रधानमंत्री ने इसे 'डॉलर के बदले डॉलर' की नीति बताते हुए कहा कि उनका देश अनुचित व्यापार प्रथाओं को स्वीकार नहीं करेगा। इस जवाबी कार्रवाई के तहत कनाडा ने अमेरिका से आयात होने वाले इस्पात, एल्युमीनियम, कृषि उत्पादों और उपभोक्ता वस्तुओं सहित सैकड़ों श्रेणियों पर शुल्क बढ़ा दिए हैं। विशेष रूप से टॉयलेट पेपर, लकड़ी और डेयरी उत्पादों जैसे रोजमर्रा की वस्तुओं पर शुल्क बढ़ने से अमेरिकी उपभोक्ताओं को महंगाई का सामना करना पड़ सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस व्यापार युद्ध के कारण अमेरिका में टॉयलेट पेपर की कीमतों में भारी वृद्धि देखने को मिल रही है। कनाडा के वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि ये शुल्क तब तक लागू रहेंगे जब तक अमेरिका अपने अनुचित टैरिफ वापस नहीं ले लेता। व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि यह तनाव दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए हानिकारक साबित होगा। कनाडा अमेरिका का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और दोनों देशों के बीच प्रतिदिन अरबों डॉलर का व्यापार होता है। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, बातचीत के टूटने और एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप के बाद यह स्थिति पूर्ण व्यापार युद्ध में बदल गई है। कनाडा की 'बैड कॉप' रणनीति के तहत सख्त रुख अपनाया गया है, जिससे अमेरिकी प्रशासन पर दबाव बढ़ेगा। अंत में, यह स्पष्ट है कि दोनों देशों के बीच तनाव जल्द कम होने के आसार नहीं हैं। कनाडा का 5.4 अरब डॉलर का पैकेज घरेलू उद्योगों को राहत देगा, लेकिन लंबे समय में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और उपभोक्ता कीमतों पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। विशेषज्ञों का सुझाव है कि कूटनीतिक वार्ता के माध्यम से ही इस गतिरोध को सुलझाया जा सकता है, अन्यथा वैश्विक अर्थव्यवस्था को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।