📰 Kotputli News
Breaking News: ट्रम्प का ईरान के साझेदारों पर द्वितीयक प्रतिबंधों का खतरा: भारत और चीन पर गहरा असर
🕒 1 week ago

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए उसके व्यापारिक साझेदारों को द्वितीयक प्रतिबंधों की चेतावनी दी है। इस कदम का उद्देश्य ईरान के तेल निर्यात और वित्तीय लेन-देन को पूरी तरह रोकना है। ट्रम्प प्रशासन की इस नीति का असर न केवल ईरान बल्कि भारत, चीन जैसे प्रमुख खरीदार देशों पर भी पड़ रहा है। अमेरिका ने हाल ही में भारत स्थित चार कंपनियों और तीन भारतीय नागरिकों पर प्रतिबंध लगाए हैं, जिन्हें ईरान के पेट्रोकेमिकल क्षेत्र से जुड़े होने का आरोप है। इस कार्रवाई से भारत की ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक हितों पर सवाल उठ खड़े हुए हैं। भारत लंबे समय से ईरान से कच्चा तेल आयात करता रहा है, लेकिन अमेरिकी दबाव के चलते उसे वैकल्पिक स्रोत तलाशने पड़े हैं। प्रतिबंधों का दायरा बढ़ने से भारतीय कंपनियों के लिए ईरान के साथ कारोबार करना बेहद जोखिम भरा हो गया है। हालांकि, भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह केवल संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों को मानता है, एकतरफा अमेरिकी प्रतिबंधों को नहीं। उधर, ईरान की अर्थव्यवस्था गहरे संकट में है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ईरानी रियाल रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है, जहां एक डॉलर की कीमत बीस लाख रियाल तक हो गई है। इस मुद्रा अवमूल्यन से आम जनता की क्रय शक्ति लगभग समाप्त हो गई है। खाद्य पदार्थों और दवाओं की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे मानवीय संकट गहराता जा रहा है। चीन इस प्रतिबंध व्यवस्था की सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। चीन ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार बना हुआ है और उसने अमेरिकी प्रतिबंधों को खुलकर नजरअंदाज किया है। चीनी बैंक और शिपिंग कंपनियां ईरान के साथ लेन-देन जारी रखे हुए हैं, जिससे प्रतिबंधों की प्रभावशीलता पर सवाल उठते हैं। अमेरिका के लिए चीन पर दबाव डालना रणनीतिक रूप से जटिल है, क्योंकि दोनों देशों के बीच पहले से ही व्यापार और प्रौद्योगिकी को लेकर तनाव चल रहा है। इस सबके बीच, भारत का ईरान को चावल निर्यात प्रतिबंधों के बावजूद जारी रह सकता है। मानवीय आधार पर खाद्य पदार्थों को अक्सर प्रतिबंधों से छूट दी जाती है। साथ ही, चाबहार बंदरगाह परियोजना में भारत के रणनीतिक हित जुड़े हुए हैं, जो अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच का मार्ग प्रशस्त करता है। निष्कर्षतः, ट्रम्प की प्रतिबंध नीति ईरान को अलग-थलग करने में आंशिक रूप से सफल रही है, लेकिन चीन और भारत जैसे बड़े देशों के व्यावहारिक रुख के कारण इसके दीर्घकालिक परिणाम अनिश्चित बने हुए हैं।

Stay connected with Kotputli News for latest updates.


📲 Share on WhatsApp
✍️ By Pradeep Yadav | 26 Aug 2026