नेपाल के उत्तरी इलाकों में शुक्रवार को आई भीषण अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। तिब्बत सीमा के निकट स्थित कई जिलों में बादल फटने और भारी बारिश के कारण नदियों का जलस्तर अचानक बढ़ गया, जिससे कई गांव पूरी तरह बह गए। अधिकारियों के अनुसार अब तक कम से कम 8 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि दर्जनों लोग लापता बताए जा रहे हैं। मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है क्योंकि कई इलाकों से संपर्क पूरी तरह टूट चुका है। प्रभावित क्षेत्रों में सिंधुपालचौक, रसुवा और धादिंग जिले सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। बाढ़ के कारण कई जलविद्युत परियोजनाओं और सड़क परियोजनाओं को भी भारी नुकसान पहुंचा है। नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और स्थानीय प्रशासन राहत एवं बचाव कार्य में जुट गए हैं, लेकिन खराब मौसम और भूस्खलन के कारण हेलीकॉप्टरों को उतरने में मुश्किल हो रही है। कई गांवों तक पहुंचने के लिए पैदल ही रास्ता तय करना पड़ रहा है। प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' ने आपात बैठक बुलाकर स्थिति की समीक्षा की और त्वरित राहत पहुंचाने के निर्देश दिए। सरकार ने सभी प्रभावित जिलों में हाई अलर्ट घोषित कर दिया है। नदी किनारे बसे गांवों को खाली कराकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों में और भारी बारिश की चेतावनी जारी की है, जिससे स्थिति और बिगड़ सकती है। स्थानीय निवासियों ने बताया कि रात के अंधेरे में अचानक पानी का सैलाब आया, जिससे उन्हें संभलने का मौका ही नहीं मिला। कई परिवारों के पूरे घर बह गए और वे केवल जान बचाकर भाग सके। राहत शिविरों में भोजन, पानी और दवाओं की व्यवस्था की जा रही है, लेकिन प्रभावितों की बड़ी संख्या के कारण संसाधन कम पड़ रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय सहायता एजेंसियों ने भी मदद की पेशकश की है। इस त्रासदी ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशीलता को उजागर किया है। जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसी चरम मौसमी घटनाओं की आवृत्ति बढ़ रही है। नेपाल सरकार को दीर्घकालिक उपायों पर विचार करना होगा, जिसमें नदी किनारे बसावट का नियमन, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली को मजबूत करना और आपदा प्रबंधन क्षमता बढ़ाना शामिल है। फिलहाल पूरा ध्यान बचाव कार्यों और प्रभावितों को राहत पहुंचाने पर केंद्रित है।