न्यूयॉर्क शहर के मेयर जोहरन मामदानी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत के आगामी मैडिसन स्क्वायर गार्डन कार्यक्रम का कड़ा विरोध व्यक्त किया है। मेयर मामदानी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे इस रैली का समर्थन नहीं करते और इसके आयोजन को लेकर गहरी असहमति जताई है। इस बयान के बाद अमेरिका में भारतीय मूल के समुदायों और विभिन्न धार्मिक संगठनों के बीच तीखी बहस छिड़ गई है। मामदानी का यह रुख उनके प्रगतिशील राजनीतिक दृष्टिकोण और अल्पसंख्यक अधिकारों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल (आईएएमसी) और सहयोगी धार्मिक संगठनों ने भी इस कार्यक्रम के विरोध में प्रदर्शन का आयोजन किया है। इन संगठनों का आरोप है कि आरएसएस का एजेंडा सांप्रदायिक विभाजन और अल्पसंख्यकों के खिलाफ नफरत फैलाने वाला है। प्रदर्शनकारियों ने मैडिसन स्क्वायर गार्डन के बाहर जमा होकर नारेबाजी की और मांग की कि ऐसे आयोजनों को सार्वजनिक स्थानों पर अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, इन संगठनों ने मामदानी के रुख का स्वागत करते हुए इसे साहसिक कदम बताया। वहीं, एनडीटीवी से बातचीत में मेयर मामदानी ने दोहराया, "मैं इस रैली का समर्थन नहीं करता।" उन्होंने कहा कि न्यूयॉर्क विविधता और समावेशिता का शहर है, और ऐसे आयोजन जो विभाजनकारी विचारधारा को बढ़ावा देते हैं, शहर के मूल्यों के विरुद्ध हैं। हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, मामदानी ने यह भी कहा कि वे "गहरे विरोध में हैं, लेकिन..." अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान करते हुए कानूनी सीमाओं के भीतर ही कदम उठाएंगे। इस बीच, एक गायक ने सोशल मीडिया पर मामदानी को "पूंजीपति बनो, पैसा जुटाओ" जैसी सलाह देकर विवाद को और हवा दे दी। इस पूरे प्रकरण ने अमेरिका में भारतीय प्रवासी समुदाय के भीतर वैचारिक मतभेदों को उजागर कर दिया है। एक तरफ जहां कुछ समूह इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मामला बता रहे हैं, वहीं अन्य इसे नफरत फैलाने वाले मंच के रूप में देख रहे हैं। मेयर मामदानी का स्पष्ट विरोध न्यूयॉर्क शहर की समावेशी नीतियों की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर कानूनी, सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर आगे की बहस देखी जा सकती है, जो अमेरिका में बहुसंस्कृतिवाद और दक्षिणपंथी विचारधारा के टकराव को रेखांकित करेगी।