ऑपरेशन सिंदूर को लेकर चल रही तमाम अटकलों और मीडिया रिपोर्ट्स पर पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने स्पष्टीकरण देकर स्थिति साफ कर दी है। पाकिस्तान के सर्गोधा स्थित किराना हिल्स परमाणु प्रतिष्ठान पर भारतीय हमले की खबरों को खारिज करते हुए उन्होंने साफ कहा कि भारत ने जानबूझकर इस संवेदनशील ठिकाने को निशाना नहीं बनाया था। जनरल चौहान के अनुसार, ऑपरेशन के दौरान एक लॉइटरिंग म्यूनिशन (भटकता हुआ गोला-बारूद) ईंधन की कमी के कारण अनजाने में किराना हिल्स क्षेत्र में जा गिरा था। यह बयान उन तमाम रिपोर्ट्स का सीधा खंडन करता है जिनमें दावा किया जा रहा था कि भारत ने पाकिस्तान के परमाणु ठिकानों को जानबूझकर टारगेट किया था। पूर्व सीडीएस ने ऑपरेशन सिंदूर की रणनीतिक पृष्ठभूमि और निर्णय लेने की प्रक्रिया पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि जब पाकिस्तान ने बातचीत की पेशकश की थी, उस वक्त भारत ने सर्गोधा एयरबेस पर हमले को मंजूरी दी थी। जनरल चौहान के शब्दों में, "राजनीति और युद्ध अविभाज्य हैं" - इस सिद्धांत के तहत सैन्य कार्रवाई को राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए सटीक ढंग से अंजाम दिया गया। उनका यह खुलासा ऑपरेशन की गोपनीय योजना और कार्यान्वयन की झलक देता है, जहां हर कदम सोच-समझकर उठाया गया था। किराना हिल्स की घटना पर विस्तार से बताते हुए जनरल चौहान ने तकनीकी पहलुओं को सामने रखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि लॉइटरिंग म्यूनिशन एक निश्चित समय तक हवा में मंडराकर लक्ष्य तलाशते हैं, लेकिन ईंधन समाप्त होने पर वे अनियंत्रित होकर गिर सकते हैं। ऐसा ही एक म्यूनिशन अपने निर्धारित लक्ष्य से भटककर किराना हिल्स क्षेत्र में जा गिरा। यह घटना न तो योजनाबद्ध थी और न ही परमाणु प्रतिष्ठान को निशाना बनाने की मंशा दर्शाती है। इस स्पष्टीकरण का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमला अंतरराष्ट्रीय कानूनों और मानदंडों का गंभीर उल्लंघन माना जाता है। ऑपरेशन सिंदूर की सफलता और उसके बाद की कूटनीतिक स्थिति पर टिप्पणी करते हुए पूर्व सीडीएस ने जोर देकर कहा कि भारत की सैन्य कार्रवाई सटीक, अनुपातिक और विशिष्ट सैन्य लक्ष्यों तक सीमित थी। पाकिस्तान के आतंकी ढांचे को नष्ट करना और उसकी युद्ध क्षमता को कमजोर करना ही मुख्य उद्देश्य था। जनरल चौहान के अनुसार, पाकिस्तान द्वारा बातचीत की पहल करना भारतीय कार्रवाई की प्रभावशीलता का प्रमाण है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि युद्धविराम का निर्णय राजनीतिक नेतृत्व ने सैन्य उद्देश्यों की पूर्ति के बाद लिया था। पूर्व सीडीएस अनिल चौहान के इस विस्तृत स्पष्टीकरण से ऑपरेशन सिंदूर को लेकर फैली भ्रांतियों पर विराम लगना तय है। उनके बयान न केवल तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट करते हैं, बल्कि भारत की जिम्मेदार परमाणु शक्ति और पेशेवर सैन्य दृष्टिकोण को भी रेखांकित करते हैं। किराना हिल्स की घटना को अनजानी तकनीकी चूक बताकर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने भारत की पारदर्शिता और संयम का परिचय दिया है। यह खुलासा भविष्य में सैन्य अभियानों की योजना और कार्यान्वयन में तकनीकी पहलुओं के महत्व को भी उजागर करता है।