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Breaking News: चीनी संकट: त्योहारी सीजन में भाव 65 रुपये किलो पहुंचे, सरकारी कदम से 18% गिरावट पर मिलों का आयात सीमित
🕒 2 weeks ago

देश में चीनी बाजार इन दिनों अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव का सामना कर रहा है। जहां एक साल पहले चीनी अधिशेष की आशंका जताई जा रही थी, वहीं त्योहारी सीजन से ठीक पहले खुदरा बाजार में भाव 65 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गए। इस अचानक आई तेजी ने उपभोक्ताओं के साथ-साथ सरकार को भी चिंता में डाल दिया। इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) ने इस मूल्य वृद्धि को 'अस्वाभाविक' करार देते हुए इसके पीछे जमाखोरी और सट्टेबाजी को मुख्य वजह बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि उत्पादन अनुमानों में कमी और निर्यात प्रतिबंधों के बावजूद घरेलू उपलब्धता पर्याप्त होने के बावजूद कृत्रिम कमी पैदा की गई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने त्वरित कदम उठाते हुए शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी और जमाखोरों पर सख्त कार्रवाई शुरू की। खाद्य सचिव के अनुसार, इन उपायों का तत्काल असर दिखा और एक्स-मिल कीमतें 18 प्रतिशत गिरकर 55 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गईं। सरकार ने 5 लाख टन चीनी के शुल्क-मुक्त आयात का कोटा तय किया है, लेकिन उद्योग सूत्रों के मुताबिक मिलें और रिफाइनरी घरेलू कीमतें कम होने के कारण इस कोटे का केवल आधा हिस्सा ही आयात कर सकती हैं। इससे वैश्विक बाजार की तुलना में भारतीय चीनी की प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित हो रही है। इस्मा के आंकड़ों के अनुसार, चालू सीजन में चीनी उत्पादन पिछले वर्ष की तुलना में कम रहने का अनुमान है, लेकिन घरेलू खपत के लिए पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। संगठन का तर्क है कि मूल्य वृद्धि का आधार बाजार के मूलभूत कारक नहीं, बल्कि सट्टा कारोबार और कृत्रिम कमी पैदा करने की कोशिशें हैं। सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत स्टॉक सीमा तय कर दी है और राज्यों को जमाखोरों के खिलाफ छापेमारी के निर्देश दिए हैं। त्योहारी मांग को देखते हुए खुदरा कीमतों में नरमी आने में अभी कुछ समय लग सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि सरकार के हस्तक्षेप और नए सीजन की आवक शुरू होने के साथ ही कीमतों में स्थिरता आएगी। हालांकि, चीनी मिलों की वित्तीय सेहत और गन्ना किसानों के बकाया भुगतान को देखते हुए दीर्घकालिक नीति की जरूरत है। आयात-निर्यात नीति में स्थिरता, एथनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम का विस्तार और बफर स्टॉक प्रबंधन जैसे उपाय भविष्य में ऐसे संकट रोकने में मददगार साबित हो सकते हैं। फिलहाल उपभोक्ताओं को राहत मिलनी शुरू हो गई है, लेकिन त्योहारी सीजन तक खुदरा कीमतें पूरी तरह सामान्य होने में वक्त लगेगा।

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✍️ By Pradeep Yadav | 25 Aug 2026