तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने केंद्र सरकार द्वारा उनकी प्रस्तावित अमेरिका यात्रा की अनुमति न दिए जाने पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे 'तेलंगाना के 4 करोड़ लोगों का अपमान' करार दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र का यह कदम संघीय सहयोगवाद (फेडरल कोऑपरेटिविज्म) की भावना के विरुद्ध है और यह एक निर्वाचित राज्य सरकार के अधिकारों का हनन करता है। रेवंत रेड्डी ने हैदराबाद लौटने के बाद मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि उनकी यात्रा राज्य में निवेश आकर्षित करने और विकास योजनाओं को गति देने के उद्देश्य से थी, जिसे राजनीतिक कारणों से रोका गया है। मुख्यमंत्री ने केंद्र के इस फैसले को असंवैधानिक बताते हुए कहा कि एक मुख्यमंत्री को अपने राज्य के विकास के लिए विदेश यात्रा करने से रोकना सहकारी संघवाद के सिद्धांतों पर सीधा आघात है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नीत केंद्र सरकार विपक्ष शासित राज्यों के साथ भेदभावपूर्ण रवैया अपना रही है। रेवंत रेड्डी ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी यात्रा के दौरान किसी विवादित व्यक्ति या संगठन से मिलने का कोई कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह पूरी तरह से व्यावसायिक और विकासोन्मुखी यात्रा थी। इस पूरे प्रकरण पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ने 'ममदानी' प्रकरण का भी जिक्र किया और कहा कि संबंधित व्यक्ति कोई असामाजिक तत्व नहीं हैं, बल्कि एक प्रतिष्ठित उद्यमी हैं। केंद्र द्वारा इस आधार पर यात्रा रोकना तर्कहीन है। रेवंत रेड्डी ने कहा कि वे इस मुद्दे को उचित मंच पर उठाएंगे और तेलंगाना की जनता के हितों की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। उन्होंने केंद्र से मांग की कि वह अपने फैसले पर पुनर्विचार करे और राज्यों को उनके संवैधानिक अधिकारों के अनुरूप कार्य करने की स्वतंत्रता दे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केंद्र-राज्य संबंधों में बढ़ते तनाव का एक और उदाहरण है। तेलंगाना सरकार का आरोप है कि केंद्र जानबूझकर राज्य के विकास कार्यों में बाधा डाल रहा है। मुख्यमंत्री के तेवर से स्पष्ट है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है। रेवंत रेड्डी ने संकेत दिया है कि वे इस मामले को प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के समक्ष भी उठाएंगे। निष्कर्षतः, तेलंगाना के मुख्यमंत्री की अमेरिका यात्रा रोके जाने का यह प्रकरण महज एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि संघीय ढांचे में राज्यों की स्वायत्तता से जुड़ा गंभीर मसला बन गया है। रेवंत रेड्डी का दृढ़ रुख दर्शाता है कि वे इस लड़ाई को तेलंगाना की अस्मिता और अधिकारों की लड़ाई के रूप में लड़ने को तैयार हैं। अब देखना होगा कि केंद्र इस पर क्या प्रतिक्रिया देता है और क्या सहकारी संघवाद की भावना बहाल हो पाती है।